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Budget 2021: सैन्य आधुनिकीकरण के लिए उम्मीद से कम, पर 15 साल का सबसे बड़ा आवंटन

Tue, 02 Feb 2021 04:34 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • 4.78 लाख करोड़ का रखा गया है इस बार रक्षा बजट, पिछली बार के मुकाबले 7 हजार करोड़ रुपये का इजाफा।
  • नए हथियार खरीदने के लिए पूंजीगत खर्च में करीब 19 फीसदी बढ़ोतरी, 1.35 लाख करोड़ रुपये मिले हैं सेना को इस मद में।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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चीन और पाकिस्तान की संयुक्त दोहरी चुनौती से जूझ रही भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के लिए इस बार आम बजट में उम्मीद से परे बेहद कम आवंटन दिखाई दिया। पिछले एक दशक में हर बार नौ फीसदी के औसत से होने वाली बढ़ोतरी इस बार महज 1.4 फीसदी पर सिमट गई, लेकिन इस कम आवंटन में भी पूंजीगत खर्च के लिए करीब 19 फीसदी का रिकॉर्ड इजाफा किया गया है। इससे नए हथियार खरीदने की राह भी खुल गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे पिछले 15 साल में सबसे ज्यादा पूंजीगत खर्च आवंटन बताया है।

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केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के ‘बहीखाते’ से सोमवार को रक्षा बजट के लिए 4,78,195.62 करोड़ रुपये निकले, जिसमें पेंशन से इतर सैन्य खर्च के लिए 7.4 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 3.62 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वित्त वर्ष 2020-21 में 4,71,378 करोड़ रुपये के रक्षा बजट में सैन्य खर्च के लिए 3.37 लाख करोड़ रुपये रखे गए थे। हालांकि वित्त मंत्री ने नए हथियारों, विमानों, युद्धपोतों व अन्य सैन्य साजोसामान की खरीद के लिए पिछले बजट में दिए गए 1,13,734 करोड़ रुपये के मुकाबले पूंजीगत खर्च के लिए इस बार 18.75 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 1,35,060 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।

लद्दाख गतिरोध ने दिलाए थे अतिरिक्त 20 हजार करोड़
बजट में यह भी स्पष्ट किया गया कि पिछले साल अप्रैल में चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में गतिरोध शुरू होने के बाद सेना को आधुनिकीकरण के मद में 20,776 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन दिया गया था। इस बजट को खर्च करने के लिए तीनों सेनाओं को आपातकालीन खरीद के अधिकार भी दिए गए थे। इस फंड की मदद से स्पाइस-2000 बम, स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, असॉल्ट राइफलें, एक्सकैलिबर हथियार, टैंक और लड़ाकू विमानों के लिए हथियार खरीदे गए थे। लेकिन इस बार अर्थव्यवस्था को कोरोना महामारी से पहुंची चोट के कारण सरकार के भारी राजकोषीय घाटे से जूझने का असर रक्षा बजट पर दिखाई दिया है।
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रक्षा बजट में पेंशन और वेतन की असली हिस्सेदारी
दुनिया में रक्षा बजट के आकार के हिसाब से भले ही भारत का स्थान अमेरिका और चीन के बाद तीसरा है, लेकिन सही मायने में इस भारी-भरकम बजट में असली हिस्सेदारी पेंशन और वेतन की है। इस बार रक्षा बजट में जहां हथियार खरीद के लिए महज 1.35 लाख करोड़ रुपये हैं, वहीं सेवानिवृत्त सैनिकों की पेंशन के लिए 1.15 लाख करोड़ रुपये और कार्यरत सैनिकों के वेतन के लिए 2.12 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

इस हिसाब से देखें तो करीब 4.78 लाख करोड़ रुपये के रक्षा बजट में से 3.27 लाख करोड़ रुपये केवल पेंशन और वेतन पर ही खर्च हो जाते हैं। इसी कारण रक्षा विशेषज्ञ बार-बार रक्षा बजट में और ज्यादा बढ़ोतरी किए जाने की जरूरत जताते रहते हैं। पिछले साल भी 4.71 लाख करोड़ के बजट में 1.33 लाख करोड़ रुपये पेंशन और 2.18 लाख करोड़ रुपये का वेतन खर्च था। 18000 करोड़ रुपये ज्यादा थे पिछले साल पेंशन मद में एरियर के कारण

पूरी नहीं हुई मांग
15वें वित्त आयोग ने 2.38 लाख करोड़ रुपये का स्थायी रक्षा बजट करने की सिफारिश की थी।

किसके हिस्से में कितना पूंजीगत खर्च
                पिछले साल           इस बार
थलसेना          33,213           36,481
वायुसेना          43,281           53,214
नौसेना            37,542           33,253
डीआरडीओ     10465            11,375
बीआरओ          5536             6004
(आंकड़े करोड़ रुपये में)

किसको मिला कितना प्रतिशत
थलसेना- 27 फीसदी
वायुसेना-  38 फीसदी
नौसेना-  24 फीसदी
अन्य-  11 फीसदी

जीडीपी के मुकाबले घटता आकार

  • 02 फीसदी था 2011-12 में जीडीपी के मुकाबले रक्षा बजट
  • 1.5 फीसदी रह गया था 2018-19 में जीडीपी के मुकाबले रक्षा बजट
  • 1.6 फीसदी ही रह गया है इस बार भी जीडीपी के मुकाबले रक्षा बजट

(15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के अनुसार)

घटता पूंजीगत, बढ़ता वेतन

  • 10 फीसदी की रफ्तार से बढ़ा है 2011-12 से रक्षा वेतन खर्च
  • 4.7 फीसदी की गति ही पकड़ पाया इस दौरान रक्षा पूंजीगत खर्च
  • 40 फीसदी से घटकर इसी कारण 33 फीसदी रह गया पूंजीगत खर्च

(15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के अनुसार)

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