एआईकेएससीसी के वरिष्ठ सदस्य साहा बताते हैं कि इस बजट में यह तक नहीं बताया गया कि 2022 आने वाला है तो उसमें किसानों की आय दोगुना कैसे होगी। सरकार इसके लिए क्या कर रही है। किसानों के लिए किसी अतिरिक्त राशि का इंतजाम किया गया है। किसान इस वादे पर भरोसा कैसे करें कि एक साल बाद उनकी आय दोगुना होने जा रही है।
दूसरा, फसलों के दाम को लेकर कोई खास घोषणा नहीं की गई। फसल बीमा, खत्म होने की कगार पर है। इसे लेकर सरकार ने आगे की किसी रणनीति का खुलासा नहीं किया। जनवरी 2016 में लागू हुई इस योजना के तहत साल भर में 5.5 करोड़ किसानों के आवेदन आते हैं। अभी तक 90,000 करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया जा चुका है। इस मामले में सरकार का कहना था कि कोविड लॉकडाउन के दौरान लगभग 70 लाख किसानों ने इस योजना का लाभ उठाया था। सरकार ने 8741.30 करोड़ रुपये के दावे लाभार्थियों को ट्रांसफर किए थे।
ग्रामीण हाट को अपग्रेड करने के बारे में वित्त मंत्री ने कुछ नहीं बताया। केंद्र सरकार ने 2018-19 के बजट में 22000 ग्रामीण कृषि मंडी (ग्राम्स) और 585 कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएमसी) में कृषि विपणन अवसंरचना के विकास और उन्नयन के लिए 2000 करोड़ रुपये के कार्पस के साथ कृषि-मंडी अवसंरचना कोष की स्थापना करने की घोषणा की थी। इसके अंतर्गत चरणबद्ध तरीके से वर्षवार 22000 ग्रामीण हाटों को उन्नत कृषि मंडी के तौर पर विकसित किया जाना था। सरकार का मकसद था कि इससे किसानों की आय को दोगुना करने में सहायता मिलेगी।
बतौर अविक साहा, अब इस योजना को लागू हुए दो साल से अधिक का समय बीत चुका है। सरकारी आंकड़े देखें तो करीब 500 मंडियों को अभी तक अपग्रेड किया जा सका है। सरकार ने कहा था कि ये लाभकारी योजना है, इसलिए किसान इस योजना का भविष्य जानने के उत्सुक थे, मगर बजट में इस बाबत कुछ नहीं कहा गया।
पीएम किसान सम्मान निधि योजना, केंद्रीय बजट में इस लेकर भी कुछ नहीं बोला गया।इस योजना को केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना माना जाता है, जिसके अंतर्गत छोटे और सीमांत किसानों को प्रतिवर्ष छह हजार की आर्थिक सहायता, तीन किस्तों में प्रदान की जाती है। वर्ष 2019 के बजट में किसान सम्मान योजना के लिए 75,000 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया था। किसानों की सत्यापन प्रक्रिया धीमी रही तो इस वजह से 2020 में कृषि मंत्रालय ने 60 हजार करोड़ रूपये का बजट मांगा था। केंद्र सरकार का कहना था कि 12 करोड़ छोटे तथा सीमांत किसानो को इस योजना के दायरे में लाया जाएगा। योजना के लिए 9.5 करोड़ से ज्यादा किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन 7.5 करोड़ किसानों का ही आधार के जरिए सत्यापन किया जा सका है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 25 दिसंबर को सातवीं किस्त जारी की है। इसके तहत 9 करोड़ से ज्यादा किसानों के बैंक खातों में 18000 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं।
2018 में पीएम-आशा योजना की घोषणा की गई थी। योजना के तहत किसानों से हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन व तिलहन की खरीदारी सरकार द्वारा की जानी थी। केंद्र सरकार ने योजना के मद में दो साल के लिए 15,053 करोड़ रुपए के बजट की घोषणा की थी। किसान नेता के मुताबिक, वित्त मंत्री द्वारा इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) के तहत संचालित मूल्य समर्थन योजना के दिशा-निर्देशों में आवश्यक बदलाव की मांग की थी। गहलोत ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भी लिखा था। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से दलहन एवं तिलहन की समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए भारत सरकार की इस योजना में संशोधन की मांग की थी। योजना में एक किसान से एक दिन में अधिकतम 25 क्विंटल उपज खरीदने की अधिकतम सीमा निर्धारित होने के कारण किसान को एक ही बार में अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस योजना के दिशा-निर्देशों में एक किसान से प्रतिदिन खरीद की अधिकतम सीमा को हटाया जाए या इसमें वृद्धि की जाए। बकौल अविक साहा, सरकार ने अपने बजट में इस योजना का जिक्र ही नहीं किया।
बजट में कृषि और उससे जुड़े उत्पादों के मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने और उसके निर्यात को बढ़ाने के लिए 'ऑपरेशन ग्रीन स्कीम' जो इस समय टमाटर, प्याज और आलू पर लागू हैं, उसका दायरा बढ़ाकर इसकी सूची में 22 और नए उत्पादों को शामिल किया गया हैं। साहा बताते हैं कि सरकार ने अपने बजट में नए उत्पाद शामिल करने की बात तो कही है, मगर यह नहीं बताया कि सरकार इसमें खुद कितना पैसा डालेगी। ये केवल लोगों को बरगलाने की बात है।