व्यापारियों के संगठन कैट ने कहा है कि सरकार ने गरीब व्यापारियों के लिए पेंशन देने का एलान कर बड़ा काम किया है। इसी प्रकार 250 करोड़ वाली कंपनियों की बजाय 400 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का टर्न ओवर रखने वाली कंपनियों को भी 25 फीसदी के कार्पोरेट टैक्स के दायरे में लाने से देश की 99 फीसदी कंपनियां आ जाएंगी। इससे भी व्यापारियों को मदद मिलेगी। हालांकि, सोने जैसी धातुओं के ड्यूटी में वृद्धि करने से कुछ व्यापारियों ने बजट की आलोचना की है।
सरकार का टैक्स कलेक्शन बढ़ा
जीएसटी लागू हुए दो वर्ष हो गये हैं। बजट में भी यह साफ हुआ है कि जीएसटी के कारण सरकार की आय में काफी बढ़ोतरी हुई है। इससे सरकार के पास अतिरिक्त पैसा आया है जो कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने में काम आएगा। पिछले वित्त वर्ष के 10,02,741 करोड़ रुपये की तुलना में इस वर्ष सरकार के पास 13.46 फीसदी ज्यादा टैक्स कलेक्शन होने की उम्मीद है।
इस वर्ष यह राशि 11,37,686 रहने का अनुमान है। जीएसटी लागू होने के पूर्व वर्ष 2013-14 में केंद्र सरकार का टैक्स कलेक्शन 6,38,596 करोड़ रहा था। जीएसटी के कारण टैक्स देने वालों की संख्या में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2017-18 में 8,44,46,376 लोगों ने टैक्स दिया है। इस वर्ष यह संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है।