देश के किसानों की आमदनी वर्ष 2022 तक दूनी हो जाए, इसके लिए बृहस्पतिवार को पेश हो रहे आम बजट में कुछ विशेष घोषणा हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को उत्पाद का बेहतर मूल्य कैसे मिले, कौन सी फसल बोयें तो उन्हें ज्यादा लाभ हो, इसके उपाय हो सकते है। यही नहीं, खेती और फसलों की बिक्री की प्रक्रिया पर केन्द्रीकृत टिप्स देने तथा विभिन्न कमोडिटी पर दी जा रही सब्सिडी पर को पुनर्संयोजित करने भी कुछ फैसला हो सकता है।
परंपरागत नहीं बागवानी फसल को तवज्जो
वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इस बजट में परंपरागत फसलों के बजाय नकदी कहें या बागवानी फसलों तथा
कृषि वाणिकी पर जोर हो सकता है। देखा जाए तो गेहूं या धान की खेती के जरिये किसानों को ज्यादा लाभ नहीं पहुंचाया जा सकता है। उनकी आमदनी बढ़ानी है तो फल, फूल, सब्जी तथा कुछ अलग फसलों की खेती करनी होगी। इसे प्रोत्साहित करने के लिए बजट में कुछ घोषणा हो सकती है। केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ने कई बार जिक्र किया है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए उन्हें एग्री प्रोडक्ट प्रोड्यूसर बनाना होगा और उनका रुझान बाजार की तरफ बढ़ाना पड़ेगा। इतना ही नहीं किसानों को भी ज्यादा उपज वाली फसलों की तरफ रुझान बढ़ाना होगा।
सिंचाई के नए साधन
इस प्रक्रिया से जुड़े एक अन्य अधिकारी का कहना है कि बजट में सिंचाई के परंपरागत साधन जैसे नहर या ट्यूबवेल से सिंचाई के बदले ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई की योजना को प्रोत्साहन देने की घोषणा हो सकती है। देखा जाए तो इस समय गंगा और यमुना जैसी सदानीरा नदियों में पानी की मात्रा घट रही है। गर्मी के दिनों में पीने के पानी की किल्लत नहीं हो, इसके लिए सरदार सरोवर बांध से इस समय किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। ऐसे में सिंचाई के वैसे साधनों को प्रोत्साहन मिल सकता है जिसमें कम से कम पानी की खपत हो।
फसल कटने के बाद बिक्री की व्यवस्था
बजट प्रक्रिया से जुड़े एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सरकार किसानों की दिक्कतें दूर करने के लिए वैसे कदमों को समर्थन दे सकती है, जिसके लिए रियल टाइम डाटा का पोर्टल बनाया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एग्री कमोडिटी के दाम पता किसानों को तुरंत मिल जाएगा। यही नहीं, उपग्रह के जरिए किसान तक जानकारी पहुंचाने की भी व्यवस्था की जा सकती है जिससे उनकी उपज और आमदनी दोनों बढ़े। सरकार बाजार से लिंकेज देने के लिए भी कुछ व्यवस्था कर सकती है। ऐसा भी हो सकता है कि किसी कमोडिटी के एमएसपी और बाजार मूल्य अंतर की लागत को केन्द्र वहन कर सकती है। कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात नीति पर भी कोई घोषणा हो सकती है।
किसानों को कम कॉरपारेट को ज्यादा मदद
कृषि अर्थशास्त्री देवेंद्र शर्मा का कहना है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने पहले बजट में किसान की आमदनी बढाने को प्राथमिकता बताया था। वह प्राथमिकता आज भी प्रासंगिक है। उन्हें लगता है कि इस बजट में सरकार किसानों की भलाई के नाम पर जो कदम उठा सकती है, वह किसानों की कम कारपोरेट की ज्यादा मदद करेगा। उनके मुताबिक सरकार इस बजट में कांट्रेक्ट फार्मिंग पर जोर दे सकती है।