बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि जिस पत्रकार ने प्रश्नपत्रों को लीक कराने का मामला सरकार के सामने लाया, उसे ही इस मामले में आरोपी बनाकर उस पर कार्रवाई कर दी गई। उन पत्रकारों को ही जेल भेज दिया गया, जबकि जो असली नकल माफिया है, उसके ऊपर कार्रवाई नहीं हो रही है...
उत्तर प्रदेश में हाल ही में बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने का मामला संसद तक पहुंच गया है। विपक्षी सांसदों ने इसे देश के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। दावा है कि पिछले पांच सालों के दौरान उत्तर प्रदेश में कम से कम 18 मामलों में पेपर्स लीक कराए हो चुके हैं।
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बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि देश में प्रश्नपत्र माफिया छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। लेकिन इन पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि इस मामले का सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जो लोग इस तरह के मामले सामने ला रहे हैं, वे लोग ही पुलिस और प्रशासन के निशाने पर हैं। यदि ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी तो इससे भविष्य में भी कोई इस तरह के मामलों का खुलासा करने की हिम्मत नहीं कर पाएगा।
दानिश अली ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि जिस पत्रकार ने प्रश्नपत्रों को लीक कराने का मामला सरकार के सामने लाया, उसे ही इस मामले में आरोपी बनाकर उस पर कार्रवाई कर दी गई। उन पत्रकारों को ही जेल भेज दिया गया, जबकि जो असली नकल माफिया है, उसके ऊपर कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने इन माफियाओं पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई कराने की मांग की।