उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी परिवार के सदस्यों में सरकार और संगठन को लेकर मची खींचतान के चलते कई मौजूदा मंत्री और विधायकों के चुनावी वक्त में पाला बदलने की सुगबुगाहट महसूस की जा रही है। कई मंत्री और विधायक साइकिल का साथ छोड़कर सुरक्षित राजनीतिक ठिकाने की तलाश में लगे हैं।
सपा में दो माह से चल रही उठापटक अब थोड़ा भले ही शांत दिख रही हो लेकिन सत्ता और सरकार में टकराव कम होता नहीं दिख रहा। कयास तक यहां तक लगाए जाने लगे कि सपा में टूट तय है, हालांकि अखिलेश यादव ऐसी किसी आशंका को खारिज कर रहे हैं। वैसे चाचा शिवपाल यादव और भतीजे अखिलेश यादव दोनों ही एक दूसरे के खिलाफ कदम उठाने से नहीं चूक रहे। हालात ऐेसे हैं कि हर जिले और विधानसभा क्षेत्र में सपा के दो खेमे बन गए हैं।
सपा से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी का मानना है कि इस खींचतान से जनता की नजरों में पार्टी कमजोर आंकी जाने लगी हैं। इसलिए कई जिम्मेदार लोग खुद को सुरक्षित करने के लिए दूसरे दलों की तरफ रुख कर लें, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। इस पदाधिकारी का यहां तक कहना है कि सपा की तरफ से अपनी कमजोर कड़ी की तलाश भी की जा रही है। ताकि उसके पार्टी छोडने पर दूसरे दमदार व्यक्ति को पेश कर भरपाई की जा सके।