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पाकिस्तानी स्नाईपर को बंकर के भीतर से जवाब देगी बीएसएफ

Sat, 01 Dec 2018 01:33 AM IST
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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भारतीय जवानों को निशाना बनाने वाले पाकिस्तानी स्नाईपर और बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) को बीएसएफ द्वारा अब बंकर के भीतर से करारा जवाब दिया जाएगा। बीएसएफ ने अपनी रिसर्च के बल पर ये बंकर तैयार किए हैं। इनकी खासियत यह होगी कि जवान इनके भीतर से ही पाकिस्तानी स्नाईपर या बैट पर न केवल नजर रखेंगे, बल्कि उन्हें अपने टारगेट पर भी ले सकेंगे। बंकरों में ही व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (सीआईबीएमएस) जैसे अत्याधुनिक उपकरण लगे होंगे। इनकी मदद से सीमा पर पाकिस्तान के नापाक इरादों, जैसे घुसपैठ और बैट की गतिविधियां, आदि का भी पता चलता रहेगा।
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बीएसएफ के डीजी रजनीकांत मिश्रा ने शुक्रवार को बल के 54वें स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर यह दावा किया है। उन्होंने कहा, सीमाओं को हर प्रकार से अभेद्य बनाने का दायित्व बीएसएफ पर है। भारत-पाक सीमा का कुछ क्षेत्र ऐसा है, जिसे भौगोलिक प्रतिकूलताओं के चलते तारबंदी से कवर नहीं किया जा सकता। कई जगह पर नदी-नालें हैं तो कहीं पहाड़ है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जंगली घास और सरकंडे भी हैं। ये इतने सघन और ऊंचे होते हैं कि इनमें कोई घुसपैठिया आसानी से छिप सकता है। सीमा के ऐसे ही इलाकों में पाकिस्तानी स्नाईपर और बैट को जवाब देने के लिए अब बीएसएफ ने अपने स्तर पर अभेद बंकर तैयार किए हैं। स्नाईपर से बचाव और बैट की गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए डीआरडीओ से भी मदद ली जा रही है। यह संस्थान भी कुछ ऐसे ही उपकरण तैयार करने में लगा है। 

 

करीब 2026 किलोमीटर लंबी सीमा को सीआईबीएमएस तकनीक से लैस किया जाएगा। यह प्रणाली मानव संसाधनों और सेंसर के प्रभावी समीकरण से घुसपैठ के प्रयासों की पहचान व उसका निस्तारण किये बिना नहीं छोड़ती है। योजना के प्रारंभिक चरण में जम्मू क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दो पायलट प्रोजेक्ट प्रारंभ किये जा चुके हैं। इनसे लगभग 5.5 किलोमीटर लंबी सीमा को कवर किया जा रहा है। असम के धुबरी जिले में ऐसी ही एक परियोजना पर कार्य चल रहा है। इस परियोजना के दिसंबर 2018 तक पूरे होने के आसार हैं। यह परियोजना ब्रम्हपुत्र नदी और उसके पास के 60 किलोमीटर के इलाके को कवर करेगी।

 

डीआरडीओ ने बीएसएफ का खाना चैक किया है, जताई 97 फीसदी संतुष्टि

डीजी रजनीकांत मिश्रा ने एक सवाल के जवाब में कहा, पिछले दिनों बीएसएफ के खाने को लेकर वायरल हुए वीडियो में कोई सच्चाई नहीं थी। हम अपने जवानों को राशन मनी देते हैं। वे अपनी मर्जी से खाना पकवा सकते हैं। डीआरडीओ की टीम ने बीएसएफ के खाने को लेकर रिसर्च की थी। इसके तहत बीएसएफ की कई बीओपी पर बनने वाले खाने की जांच की गई। डीआरडीओ ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में बीएसएफ के खाने को लेकर 97 प्रतिशत संतुष्टि जताई है।

 
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करतारपुर कॉरिडोर, बीएसएफ के लिए कोई चेलेंज नहीं

भारत-पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरिडोर को लेकर मिश्रा का कहना है कि यह हमारे लिए कोई चैलेंज नहीं है। सरकार की ओर से जो भी जिम्मेदारी मिलेगी, बीएसएफ उसे बिना किसी हिचकिचाहट के पूरा करेगी।बीएसएफ द्वारा पहले से ही वाघा बॉर्डर और अटारी बॉर्डर पर इस जिम्मेदारी का निर्वहन किया जा रहा है।
 
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