सीमा सुरक्षा बल के जवान बिना किसी दबाव और परेशानी के अपनी ड्यूटी कर सकें, इसके लिए मुख्यालय ने नई योजना बनाई है। अगर किसी जवान के परिवार को जिला या तहसील स्तर पर कोई प्रशासनिक दिक्कत है, परिवार को बेवजह चक्कर काटने पड़ रहे हैं या पुलिस उनकी सुनवाई नहीं कर रही है तो ऐसी स्थिति में मुख्यालय और सम्बंधित यूनिट के अधिकारी, डीएम या एसपी से आग्रह कर मामले का निपटारा कराएंगे।
बीएसएफ के सूत्रों का कहना है कि बहुत से जवान केवल इस वजह से चिंतित हैं कि उनका परिवार किसी वजह से परेशान है। पिछले कुछ वर्षों से बल में स्वैच्छिक सेवानिवृति के मामले बढ़ रहे हैं। इसके चलते डीजी राकेश अस्थाना ने सभी फ्रंटियर और यूनिटों के अधिकारियों से कहा है कि वे जवानों के नियमित संपर्क में रहें। उनसे बातचीत करें और उनकी दिक्कतों का अविलंब समाधान कराया जाए।
इसके लिए बीएसएफ अधिकारी, डीएम और एसपी से बात करें। उनसे प्रार्थना की जाए कि फलां जवान हमारी इस यूनिट में तैनात है। उसका परिवार आपके जिले के इस गांव में रहता है। वहां उसे किसी प्रशासनिक कार्यवश चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कमांडर इसे लेकर डीएम व एसपी को लिखित में आग्रह पत्र भेज सकते हैं।
यदि उन्हें लगता है कि इसके बाद भी काम नहीं हो पा रहा है तो वे संबंधित जिला अधिकारी से फोन पर बातचीत कर सकते हैं। बीएसएफ का मकसद है कि जवान या उसके परिवार की परेशानी दूर होनी चाहिए। बल के अधिकारी, एक तय अंतराल के बाद बॉर्डर पर तैनात जवानों के साथ दो दिन रहें, ये आदेश भी जारी किया गया है।