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BSF Promotion: इन अफसरों को मिल सकती है पदोन्नति, कमांडेंट रैंक तक प्रमोशन के लिए केंद्रीय गृह सचिव राजी

सार

BSF Promotion: केंद्रीय सुरक्षा बलों में पांच साल बाद कैडर रिव्यू होता है। कई बार यह प्रक्रिया देरी से पूरी होती है। पहले तो बल मुख्यालय से ही तय समय पर प्रपोजल, कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी के पास नहीं पहुंचता। इससे डीओपीटी को निर्णय लेने में देरी होती है...
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BSF Promotion:केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला के साथ बीएसएफ डीजी पंकज सिंह - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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'बीएसएफ' में 'सहायक कमांडेंट' से लेकर 'कमांडेंट' स्तर तक के कैडर अफसरों के लिए समयबद्ध पदोन्नति की राह खुल सकती है। इसके लिए केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला भी राजी हैं। पिछले दिनों बीएसएफ मुख्यालय में हुई एक अहम बैठक में गृह सचिव ने 'ग्रुप ए' जीडी कैडर अफसरों की पदोन्नति को लेकर कहा, इस बार कैडर रिव्यू प्रपोजल में देरी न हो। साथ ही इसमें ऐसी संभावना भी तलाशी जाए, जिससे कमांडेंट रैंक तक के अफसरों को समयबद्ध पदोन्नति दी जा सके। इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में स्टे है, तो उसके लिए गृह मंत्रालय में एडवाइजर पी-2 कानूनी सलाह ले लें, ताकि बल की कैडर रिव्यू प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

केंद्रीय कैबिनेट देता है कैडर रिव्यू को फाइनल मंजूरी

केंद्रीय सुरक्षा बलों में पांच साल बाद कैडर रिव्यू होता है। कई बार यह प्रक्रिया देरी से पूरी होती है। पहले तो बल मुख्यालय से ही तय समय पर प्रपोजल, कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी 'सीसीए' के पास नहीं पहुंचता। इससे डीओपीटी को निर्णय लेने में देरी होती है। कैडर रिव्यू कमेटी 'सीआरसी' से फाइल पास होने में भी वक्त लगता है। इन सबके बाद वह फाइल केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के लिए जाती है। अगर सीआरपीएफ के पिछले कैडर रिव्यू की बात करें, तो उसके लिए 15 दिसंबर 2015 को सीआरसी की बैठक हुई थी। 29 जून 2016 को केंद्रीय कैबिनेट ने कैडर रिव्यू प्रपोजल को अपनी मंजूरी प्रदान की।

2016 में हुआ था बीएसएफ का कैडर रिव्यू

बीएसएफ के कैडर रिव्यू पर विचार करने के लिए 29 जून 2016 को सीआरसी की बैठक हुई। इसके बाद 12 सितंबर 2016 को उसे कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान की थी। सीआईएसएफ के कैडर रिव्यू प्रपोजल को लेकर 15 मई 2017 को सीआरसी की बैठक हुई और 10 जनवरी 2018 को उसे केंद्रीय कैबिनेट ने अपनी स्वीकृति दी। एसएसबी 'ग्रुप ए कॉम्बेटाइज्ड' के कैडर रिव्यू पर सीआरसी ने 19 जुलाई 2017 को बैठक की। इसके बाद 20 दिसंबर 2017 को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिली। आईटीबीपी के कैडर रिव्यू पर 08 फरवरी 2019 को सीआरसी की बैठक हुई, जबकि 23 अक्तूबर 2019 को इसे केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति मिली थी। बीएसएफ में सहायक कमांडेंट को कमांडेंट बनने के लिए कम से कम 25 साल लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसे लेकर बल के कैडर अफसरों में नाराजगी देखी गई है।

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BSF Promotion:केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला के साथ बीएसएफ डीजी पंकज सिंह के साथ अन्य अधिकारी - फोटो : Amar Ujala

पदोन्नति के मुद्दे पर काम कर रही है ये कमेटी

अर्धसैनिक बलों में 'पदोन्नति में स्थिरता' मुद्दे का हल तलाशने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय लगातार प्रयास कर रहा है। इस संबंध में एक कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी 'सीएपीएफ' के जीडी कैडर में अगली पदोन्नति को लेकर हो रही देरी के मामले को देखेगी। बीएसएफ में इस मुद्दे पर राय मांगी गई है। इसमें कहा गया है कि सहायक कमांडेंट 'एसी' डायरेक्ट एंट्री के पदों को 50 फीसदी से घटाकर 33 फीसदी कर दिया जाए। दूसरी ओर, जो अराजपत्रित अधिकारी 'एनजीओ' पदोन्नति के जरिए 'एसी' के पद तक पहुंचते हैं, उनके लिए पदोन्नति कोटा बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया जाए। बीएसएफ के पूर्व एडीजी संजीव कृष्ण सूद ने कहा था कि यह पहल सभी के लिए फायदेमंद रहेगी।

डायरेक्ट एंट्री और पदोन्नति का है ये नियम

'एसी' के 50 फीसदी पद डायरेक्ट एंट्री से भरे जाते हैं। इसमें 40 फीसदी पद, ओपन मार्केट यानी यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा के जरिए भरे जाते हैं। बाकी के दस फीसदी पद शॉर्ट सर्विस कमीशन 'एसएससी' के जरिए भरे जाने का प्रावधान है। ये अलग बात है कि अब लंबे समय से एसएससी वाले बीएसएफ में नहीं आते। दूसरी प्रक्रिया में 33 फीसदी पद, पदोन्नति के माध्यम से भरे जाते हैं। बाकी के 17 फीसदी पद 'एलडीसीई' यानी 'सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा' के जरिए भरे जाते हैं। एलडीसीई में नीचे के पदों पर काम करने वालों को एक टेस्ट पास करना होता है। इसे पास करने के बाद वे सीधे 'एसी' बन सकते हैं। जैसे एसआई यह परीक्षा देकर डायरेक्ट सहायक कमांडेंट बन सकता है। गृह मंत्रालय, जिस नई योजना पर काम कर रहा है, उसमें 17 फीसदी वाले एलडीसीई भी डायरेक्ट एंट्री में शामिल हो जाएंगे। ऐसे में पदोन्नति के जरिए 'एसी' बनने वालों का कोटा भी 50 फीसदी हो जाएगा।

इससे डायरेक्ट एंट्री वाले 'एसी' के पद 33 फीसदी रह जाएंगे

नई व्यवस्था में डायरेक्ट एंट्री वाले पदों का फीसदी 33 रह जाएगा। इससे नीचे वालों को पदोन्नति के बेहतर विकल्प मिलेंगे। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद बताते हैं, 'ओजीएएस' की शर्त होती है कि पचास फीसदी कोटा ओपन मार्केट से भरना होगा। इन्हें कोई परेशानी न आए, इसके लिए सर्विस रूल में ये लिखना होगा कि डायरेक्ट एंट्री कोटा में अब 17 फीसदी 'एलडीसीई' वाले भी शामिल हैं। जब ये हो जाएगा, तो डायरेक्ट एंट्री वालों को इस पर कोई ऑब्जेक्शन नहीं होगा। अमूमन, एसी के पद डायरेक्ट एंट्री वालों की औसतन आयु 28 साल होती है। एसएससी व एलडीसीई वाले जो पांच छह साल की नौकरी करने के बाद एसी बनेंगे, उनकी औसत आयु 35 से 37 साल होगी। जो प्रमोट होकर 'एसी' बनेंगे, उनकी औसतन आयु 40 से 42 वर्ष होगी।
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