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सीमा सुरक्षा बल ने 18 हजार से ज्यादा परिंदों को दी नई उड़ान

Fri, 12 Jul 2019 01:04 PM IST
Priyesh Mishra जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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तस्करों से छुड़ाए गए पक्षी - फोटो : अमर उजाला
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बीएसएफ का नाम सामने आते ही दिमाग में घुसपैठ, टारगेट, तस्कर और गोलीबारी जैसे शब्द घूमने लगते हैं। ये ठीक है, लेकिन बीएसएफ इसे परे हटकर कई ऐसे काम भी करती है, जिनकी बात सामान्य तौर पर नहीं होती। सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने 18 हजार से ज्यादा परिंदों को नई उड़ान दी है।
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इनकी वजह से सैकड़ों कछुओं को नया जीवन मिल गया तो वहीं विलुप्त प्रजाति के केकड़े भी मरने से बच गए। बीएसएफ ने इन सभी जीवों को तस्करों से मुक्त कराया है। इनमें से किसी एक जीव की बात करें तो उसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत दो लाख रुपये बताई गई है।

देश की सीमा की सुरक्षा का जिम्मा बीएसएफ के कंधों पर है। राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम और दूसरे कई हिस्सों में जीव-जंतुओं की विलुप्त हो रही प्रजातियां मिलती हैं। इन पर दूसरे मुल्कों के तस्करों की नजर रहती है। 
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उन्हें तोता, कबूतर, ऐमू, केंकड़े और कछुए आदि का अच्छा दाम मिल जाता है। कबूतर दो लाख रुपये, तोता एक लाख रुपये, ऐमू एक लाख रुपये और कछुआ भी लाखों में बिकता है। बीएसएफ ने पिछले सप्ताह डीआरआई के साथ मिलकर आइजोल में आठ लोग गिरफ़्तार किए थे। उनके कब्जे से 23 तोते, ऐमू और कबूतर बरामद हुए थे। इनकी कीमत 28 लाख रुपये बताई गई है।

घुसपैठियों के अलावा तस्करों पर भी बीएसएफ की होती है पैनी नजर

बीएसएफ के एक अधिकारी बताते हैं, हमारे जवान घुसपैठियों के अलावा तस्करों पर भी पैनी निगाह रखते हैं। कई जगह पर, खासतौर से पूर्वी हिस्से के बॉर्डर की बात करें तो वहां कंटीले तार नहीं लगे हैं। कहीं पर गलियारा है तो तस्कर उसका दुरुपयोग कर लेते हैं। तस्करों से छुड़ाए गए वन्य जीवों को बीएसएफ के जवान खिलाते-पिलाते हैं। अगर कोई घायल है तो उसका इलाज भी कराते हैं। विलुप्त प्रजाति के जीव-जंतुओं को वन्य प्राणी विभाग को सौंप दिया जाता है। 

अच्छी बात ये है कि जिन परिंदों को दोबारा से उड़ान का मौका मिलता है, वे बीएसएफ जवानों के आसपास ही मंडराते रहते हैं।खाने की तलाश में सुबह शाम बीएसएफ की चौकी पर पहुंच जाते हैं। जवान भी उनकी सेवा करने से पीछे नहीं हटते।नतीजा, अब वे परिंदे बीएसएफ के दोस्त बन गए हैं। ये परिंदे जवानों के इशारे और आवाज समझने लगे हैं।
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तस्करों से मुक्त कराए गए इन जीवों को मिली नई उड़ान

वन्य जीव 2015  2016 2017 2018 2019
पक्षी (संख्या) 417 33 741 286 17036
केकड़े (किलोग्राम) --- 2130 40 580 55
छिपकली (संख्या) 1 --- 14 5 ---
कछुआ (किलोग्राम) 659 241 183.3 126.1 100.5


खाड़ी देशों में पहुंचाए जाते हैं ये परिंदे

जांच में पता चला है कि विलुप्त प्रजातियों के परिंदे या दूसरे जीव तस्करी के जरिए खाड़ी देशों में पहुंचाए जाते हैं। किसी को शक न हो, इसके लिए इन पक्षियों को पकड़कर फलों की टोकरी या गत्ते वाले डिब्बों में बंद कर दिया जाता है। बीएसएफ या दूसरी एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए ये तस्कर फर्जी परमिशन कार्ड भी बनवा लेते हैं। ये कार्ड वन्य प्राणी विभाग के होते हैं। अधिकांश जीव-जंतुओं को पहले केरल पहुंचाया जाता है और वहां से ये खाड़ी के देशों में जाते हैं।
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