बीएसएफ के एक अधिकारी बताते हैं, हमारे जवान घुसपैठियों के अलावा तस्करों पर भी पैनी निगाह रखते हैं। कई जगह पर, खासतौर से पूर्वी हिस्से के बॉर्डर की बात करें तो वहां कंटीले तार नहीं लगे हैं। कहीं पर गलियारा है तो तस्कर उसका दुरुपयोग कर लेते हैं। तस्करों से छुड़ाए गए वन्य जीवों को बीएसएफ के जवान खिलाते-पिलाते हैं। अगर कोई घायल है तो उसका इलाज भी कराते हैं। विलुप्त प्रजाति के जीव-जंतुओं को वन्य प्राणी विभाग को सौंप दिया जाता है।
अच्छी बात ये है कि जिन परिंदों को दोबारा से उड़ान का मौका मिलता है, वे बीएसएफ जवानों के आसपास ही मंडराते रहते हैं।खाने की तलाश में सुबह शाम बीएसएफ की चौकी पर पहुंच जाते हैं। जवान भी उनकी सेवा करने से पीछे नहीं हटते।नतीजा, अब वे परिंदे बीएसएफ के दोस्त बन गए हैं। ये परिंदे जवानों के इशारे और आवाज समझने लगे हैं।
| वन्य जीव |
2015 |
2016 |
2017 |
2018 |
2019 |
| पक्षी (संख्या) |
417 |
33 |
741 |
286 |
17036 |
| केकड़े (किलोग्राम) |
--- |
2130 |
40 |
580 |
55 |
| छिपकली (संख्या) |
1 |
--- |
14 |
5 |
--- |
| कछुआ (किलोग्राम) |
659 |
241 |
183.3 |
126.1 |
100.5 |
खाड़ी देशों में पहुंचाए जाते हैं ये परिंदे
जांच में पता चला है कि विलुप्त प्रजातियों के परिंदे या दूसरे जीव तस्करी के जरिए खाड़ी देशों में पहुंचाए जाते हैं। किसी को शक न हो, इसके लिए इन पक्षियों को पकड़कर फलों की टोकरी या गत्ते वाले डिब्बों में बंद कर दिया जाता है। बीएसएफ या दूसरी एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए ये तस्कर फर्जी परमिशन कार्ड भी बनवा लेते हैं। ये कार्ड वन्य प्राणी विभाग के होते हैं। अधिकांश जीव-जंतुओं को पहले केरल पहुंचाया जाता है और वहां से ये खाड़ी के देशों में जाते हैं।