सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की साइकिल रैली का रविवार को दक्षिण बंगाल सीमांत के अंतर्गत 118वीं वाहिनी, टैगोरविला, कोलकाता पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। इसके साथ ही त्रिपुरा से चली इस रैली का आज समापन हो गया। इस दौरान 19 जवानों ने 41 दिन में 3150 किलमीटर की दूरी तय की और भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ-साथ चार राज्य, बीएसएफ के छह फरंटियर में देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया। उल्लेखनीय है कि यह साइकिल रैली 1 नबंवर को आईसीपी अखुरा, 120वीं वाहिनी, अगरतला से शुरू हुई थी।
भव्य स्वागत के बाद अजीत टेटे ने सुने अनुभव
रैली के समापन समारोह में अजीत कुमार टेटे, डीआईजी (प्रधान स्टाफ अधिकारी)/ कार्य वाहक आईजी, दक्षिण बंगाल सीमांत ने टीम के कोलकाता पहुंचने पर बीएसएफ के अन्य अधिकारियों के साथ भव्य स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने जवानों के अनुभव भी सुने। उन्होंने कहा कि जो जवान इसमें शामिल थे, उनको पारितोषिक देकर सम्मानित किया जाएगा।
अजीत टेटे कहा कि इस रैली का मुख्य उद्देश्य बॉर्डर इलाके में रहने वाले लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना पैदा करना, सीमा सुरक्षा बल के प्रति अच्छी छवि बनाना और ज्यादा से ज्यादा युवाओं को भारतीय आर्म्ड फोर्सेज में शामिल होने के लिए प्रेरित करना था। इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं को तस्करी व अन्य असामाजिक कार्यों में लिप्त न होने और उनके उज्ज्वल भविष्य को संवारने का संदेश देते हैं। अंत में उन्होंने उन प्रतिभागियों को बधाई दी जिन्होंने इस साइकिल रैली में शामिल होकर एक लंबी यात्रा तय कर एक मिशाल कायम किया है।
इस अवस पर जवानों का स्वागत करते हुए राजेश कुमार, डीआईजी सेक्टर कोलकाता ने कहा कि बीएसएफ के जवानों ने आजादी के अमृतोत्सव के तहत आयोजित इस रैली में देश एकता, अखंडता और भाईचारे का संदेश दिया। इस दौरान जवानों ने सीमा वर्ती लोगों खासकर युवाओं को ड्रग्स से दूरी बनाने तथा तस्कीर जैसे अपराध से दूर रहने के लिए जागरूक किया। कार्यक्रम में अन्यों के अलावा बीएसएफ दक्षिण बंगाल सीमांत के अंतर्गत 118वीं वाहिनी के कमांडेंट राजेश कुमार त्रिपाठी और एके आर्य, डीआईजी-जी उपस्थित थे।
रोजाना चलाते थे 90 से 100 किलोमीटर, मासूम बच्चों ने दिल जीता
साइकिल रैली टीम के कैप्टन विकास कुंडू ने कहा कि टीम में कुल 19 लोग शामिल थे। इनमें पूर्वोत्तर के बीएएसएफ के छह फरंटियर से प्रत्येक से तीन-तीन जवान थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने 41 दिन में कुल 3150 किलोमीटर का सफर तय किया, जिसमें भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ चार राज्य और बीएसएफ के छह फरंटियर शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस यात्रा में वे रोजाना 90 से 100 किलोमीटर की यात्रा करते थे। इस दौरान हर जगह उनको सबका साथ और सहयोग मिला। उन्होंने बताया कि रैली में जगह-जगह छोटे-छोटे मासूम बच्चे भारतीय झंडा लिए, भारत माता की जय, बंदे मातरम के नारे लगाते हुए मिलते थे, जो दिल को छू जाता था। बीएसएफ के प्रति लोगों का प्यार देखते ही बनता था।