इस फैसले से 2023 में विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने तक ये 17 अयोग्य विधायक विधानसभा का उपचुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। हालांकि, अगर समय से पहले विधानसभा भंग हुई तभी 2023 से पहले ये फिर से विधायक बन सकते हैं। वहीं, फिलहाल भाजपा को वैसे तो कोई खतरा नहीं है, मगर उपचुनाव होने की स्थिति में उसे बहुमत बनाए रखने के लिए 17 सीटों में से कम से आधी तो जीतनी होगी।
विधानसभा अध्यक्ष को भी छोड़ना होगा पद
इससे पहले भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार को पद छोड़ने के लिए कह दिया है जो पारंपरिक तौर पर सतारूढ़ पार्टी के किसी सदस्य के पास होता है। अगर वह सोमवार को इस्तीफा नहीं देते हैं तो भाजपा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी।