राफेल लड़ाकू विमान को लेकर बढ़ते विवाद के बीच वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ ने बुधवार को कहा कि यह सौदा ‘‘अच्छा पैकेज’’ है और विमान उपमहाद्वीप के लिए ‘‘महत्वपूर्ण’’ साबित होगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि दसॉल्ट एविएशन ने ऑफसेट साझेदार को चुना और सरकार तथा भारतीय वायुसेना की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हमें अच्छा पैकेज मिला, राफेल सौदे में कई फायदे मिले हैं।
दिल्ली में बुधवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय वायुसेना प्रमुख ने कहा, "जो कॉन्ट्रैक्ट HAL को पहले से दिए गए हैं, उनके डिलीवरी शेड्यूल में देरी रही है। सुखोई-30 की डिलीवरी में तीन साल की देरी है। जगुआर में छह साल की देरी है। LCA में पांच साल की देरी है। मिराज 2000 अपग्रेड की डिलीवरी में दो साल की देरी है।" धनोआ ने कहा, "राफेल और एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के सौदे बूस्टर डोज की तरह हैं। जब भी सरकार इसे मंजूरी दे देगी, 24 माह के भीतर डिलीवरी हो जाएगी"।
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ से पूछा गया कि क्या भारतीय वायुसेना को इस बात की सूचना दी गई थी कि राफेल सौदे में खरीदे जाने वाले विमानों की संख्या 126 से बदलकर 36 की जा रही है। इसके जवाब में एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा, "उचित स्तर पर भारतीय वायुसेना से परामर्श किया गया था। भारतीय वायुसेना ने कुछ विकल्प दिए थे। उनमें से चुनाव करना सरकार का काम है"।
एयर चीफ मार्शल ने बताया, "सरकारों के बीच हुए सौदे के रूप में दो स्क्वाड्रन खरीदने का फैसला किया गया, ताकि एमरजेंसी आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके।
बता दें कि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष सरकार पर राफेल सौदे में अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रहा है। भाजपा ने इन सभी आरोपों को झूठा बताया है। राफेल विवाद में दिलचस्प मोड़ पिछले महीने तब आया जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के हवाले से कहा गया कि फ्रांस को दसॉल्ट के वास्ते भारतीय साझेदार चुनने के लिए कोई विकल्प नहीं दिया गया था। भारत सरकार ने फ्रेंच एयरोस्पेस कंपनी के लिए ऑफसेट साझेदार के रूप में रिलायंस के नाम का प्रस्ताव रखा था।
मोदी ने 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में ओलांद के साथ बातचीत के बाद 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा की थी।