तेलंगाना विधान परिषद के बाहर शनिवार को भारत राष्ट्र समिति (BRS) के विधान परिषद सदस्यों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान सदस्यों ने हल्दी किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 15 हजार रुपये करने की मांग की। इस दौरान एमएलसी ने हाथों में तख्तियां पकड़कर नारे लगाए।
तेलंगाना विधान परिषद के बाहर शनिवार को भारत राष्ट्र समिति (BRS) के विधान परिषद सदस्यों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान सदस्यों ने हल्दी किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 15 हजार रुपये करने की मांग की। इस दौरान एमएलसी ने हाथों में तख्तियां पकड़कर नारे लगाए।
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बीआरएस एमएलसी के कविता ने कहा कि हल्दी किसान काफी समय से परेशान हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने हल्दी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय नहीं किया है। तेलंगाना भर के किसान परेशान हैं। हम हल्दी किसानों को 15,000 रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की मांग कर रहे हैं। यह कांग्रेस सरकार द्वारा किया गया चुनावी वादा भी था कि वे 12,000 रुपये एमएसपी के रूप में देंगे।
लम्बाडा जनजाति को नहीं मिली कैबिनेट में जगह
बीआरएस एमएलसी के कविता ने कहा कि चाहे तेलंगाना हो या आंध्र प्रदेश, अल्पसंख्यक, लम्बाडा जनजाति के व्यक्ति को हमेशा प्रतिनिधित्व दिया जाता है लेकिन इतिहास में पहली बार लम्बाडा जनजाति के किसी व्यक्ति को कैबिनेट में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। हमने राज्य सरकार से लम्बाडा जनजाति के एक सदस्य को कैबिनेट में शामिल करने की मांग की है।
हमें डराने की कोशिश की जा रही
एमएलसी के कविता ने कहा कि तेलंगाना विधानसभा और विधान परिषद दोनों में बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम हुआ। सरकार बहुत परेशान है और वे किसी तरह हमारे सदस्यों को नाम से बुलाकर हमें डराने की कोशिश कर रहे हैं और हमारे सदस्यों को निलंबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज विधान परिषद में जब हम मुद्दे उठाने की कोशिश कर रहे थे तो एक सदस्य को निलंबित कर दिया। अध्यक्ष ने हमारे सदस्यों को उपद्रवी कहा और उन्हें एक-शब्द के वाक्यों में संदर्भित किया। हम मांग करते हैं कि अध्यक्ष तुरंत उन असंसदीय शब्दों को वापस लें जो उन्होंने हमारे सदस्यों के लिए इस्तेमाल किए हैं और मुझे उम्मीद है कि कल से विधान परिषद के अध्यक्ष द्वारा अधिक लोकतांत्रिक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।