'जूनियर खिलाड़ियों का हक मार रहे पहलवान'
ब्रजभूषण सिंह ने 2 मई, 2023 को एक इंटरव्यू के दौरान इन आरोपों का खंडन किया था और खुद को बेकसूर बताया था। उन्होंने कहा था कि धरना दे रहे पहलवान अब खेलने लायक नहीं हैं और उनके खेलने की उम्र हो चुकी है, तो अब जूनियर खिलाड़ियों का हक मार रहे हैं और घरेलू टूर्नामेंट नहीं होने दे रहे हैं। उन्होंने कहा था, "जब आप जनवरी में धरने पर बैठे तो एक-दो दिन बाद गोंडा में प्रतियोगिता चल रही थी। इसे इन लोगों ने रुकवाया। एशिया जूनियर चैम्पियनशिप भारत को अलॉट थी, लखनऊ में लड़कियों के कैम्प को रुकवाया। जब तीन महीने तक जांच की प्रक्रिया पूरी हो गई, तब बच्चों का नुकसान न हो, खेल की गतिविधियां बंद न हों, यह ध्यान रखा। इसी साल एशियन गेम्स होने हैं, ओलंपिक के लिए क्वालिफाई होना है, कई टूर्नामेंट जून और जुलाई में होने हैं। यहां भारत में कुश्ती बंद है। यह सब सोचकर हमने सोचा कि हम तो लड़ाई लड़ते रहेंगे, लेकिन गरीब बच्चों का नुकसान न हो। तब इन्होंने सवाल उठाया कि नेशनल क्यों कराया। हमारी-इनकी लड़ाई में अन्य का क्या दोष है?"
उन्होंने कहा था, "कुश्ती संघ ही नेशनल टूर्नामेंट करा सकता है, सरकार नहीं करा सकती। ये कहते हैं कि हम खेल को बचाने के लिए बैठे हैं। आपको तो पद्मश्री, अर्जुन अवॉर्ड भी मिल गया। आगे लगता नहीं कि आप कुछ पाने वाले हैं, इसमें इनकी गलती नहीं है क्योंकि खेल की उम्र होती है, जिसे ये पार कर गए हैं, लेकिन जूनियर खिलाड़ियों का ये हक क्यों मार रहे हैं? खेल बचाने की जगह उसका सत्यानाश क्यों कर रहे हैं? अगर आप फेडरेशन को नेशनल्स नहीं कराने देते तो सरकार कराए। खेल का विरोध क्यों कर रहे हैं? नहीं करना चाहिए।"
'खुद को राम तो महिला पहलवानों को बताया मंथरा'
यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे कैसरगंज सांसद ने इसी महीने 20 मई को अपने संसदीय क्षेत्र के धनईगंज बंधे पर एक कार्यक्रम में भाषण देते हुए खुद की तुलना भगवान श्रीराम से तुलना कर डाली। बृजभूषण ने धरना दे रहीं महिला पहलवानों को मंथरा बता दिया था। उन्होंने कहा था, मंथरा ने राम को 14 वर्ष के लिए वनवास भेज दिया था, लेकिन यदि राम वन नहीं जाते तो वह कभी केवट से न मिलते, शबरी के जूठे बेर न खाते। हनुमान और सुग्रीव से मित्रता न होती और रावण जैसे महापापी का अंत कैसे होता।' सांसद ने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि भगवान ने मेरे लिए अभी कुछ और काम तय कर रखे हैं। उन्होंने कहा कि वह सब कुछ हो सकते हैं लेकिन जो आरोप लगा है वह नहीं हो सकते। इस तरह की बातों से लोग अवाक रहे। बृजभूषण के भाषण को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा रही।
'मैं नार्को टेस्ट के लिए तैयार, बजरंग-विनेश का भी वही टेस्ट'
21 मई को बृजभूषण सिंह ने अपने फेसबुक पर एक फोटो शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि वह नार्को या लाइ डिटेक्टर टेस्ट कराने के लिए तैयार हैं, लेकिन बजरंग पूनिया और विनेशन फोगाट को भी वही टेस्ट कराना होगा। बृजभूषण ने लिखा- "मैं अपना नार्को टेस्ट, पॉलिग्राफी टेस्ट या लाइ डिटेक्टर करवाने के लिये तैयार हूं, लेकिन मेरी शर्त है मेरे साथ विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया के भी ये टेस्ट होने चाहिए। अगर दोनों पहलवान अपना टेस्ट करवाने के लिये तैयार हैं तो प्रेस बुलाकर घोषणा करें और मै उनको वचन देता हूं कि मैं भी इसके लिये तैयार हूं... बृजभूषण शरण सिंह सांसद कैसरगंज। मैं आज भी अपनी बात पर कायम हूं और हमेशा कायम रहने का देशवासियों को वादा करता हूं.... रघुकुल रीती सदा चली आयी, प्राण जाये पर वचन न जाई।।....जयश्रीराम"
'आरोप साबित हुए तो खुद लगा दूंगा फांसी'
पहलवानों के द्वारा मेडल गंगा में बहा देने की चेतावनी को लेकर भाजपा सांसद ब्रजभूषण ने 31 मई को बाराबंकी में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था- मैंने कहा था कि अगर एक भी आरोप मेरे ऊपर साबित हो जाएगा, तो मैं स्वयं फांसी पर लटक जाऊंगा। आज भी मैं उसी बात पर कायम हूं। भाजपा सांसद ने कहा था, चार महीने हो गए वो मेरी फांसी चाहते हैं लेकिन सरकार मुझे फांसी नहीं दे रही है तो वो (पहलवान) अपना मेडल लेकर गंगा में बहाने जा रहे हैं। मुझ पर आरोप लगाने वालों गंगा में मेडल बहाने से बृज भूषण को फांसी नहीं मिलेगी। अगर तुम्हारे पास सबूत है तो न्यायलय को दो और न्यायालय मुझे फांसी देगा तो मुझे वो स्वीकार है।