ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने रविवार को कहा कि ब्रिक्स देशों को अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और समावेशी वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की दिशा में काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्तीय और व्यापारिक व्यवस्थाओं पर अत्यधिक निर्भरता ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं को राजनीतिक झटकों के प्रति कमजोर बना दिया है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए पेजेश्कियान ने पश्चिमी देशों पर निशाना साधा और 'एकतरफा प्रतिबंधों' की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों का वैश्विक खाद्य सुरक्षा और लोगों के कल्याण पर सीधा असर पड़ रहा है। पेजेश्कियान की यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ सप्ताह बाद आई है। इन प्रतिबंधों से तेहरान की वित्तीय स्थिति पर दबाव और बढ़ा है।
वैश्विक व्यवस्था में ब्रिक्स की भूमिका कितनी अहम?
मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि अधिक संतुलित, समावेशी और न्यायपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने में ब्रिक्स को बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लचीलापन, सहयोग और स्थिरता को व्यावहारिक कदमों में बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के बिना आर्थिक मजबूती कायम नहीं रह सकती। इस दौरान उन्होंने अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई का भी उल्लेख किया।
पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान के आर्थिक, ऊर्जा और विकास से जुड़े बुनियादी ढांचे पर हमलों के राष्ट्रीय सीमाओं से बाहर भी परिणाम हो सकते हैं और इससे क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान के लोगों ने इसकी भारी कीमत चुकाई है। बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए और दशकों में तैयार किया गया बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है।
भारत की तारीफ में क्या बोले मसूद पेजेश्कियान?
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों की रक्षा करे और 'नागरिक ठिकानों पर हमलों को सामान्य मानने' की प्रवृत्ति को रोके। पेजेश्कियान ने शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत, भारतीय जनता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की थीम 'लचीलापन, सहयोग और स्थिरता' ऐसे समय में दुनिया की मूलभूत जरूरतों को दर्शाती है, जब देशों का भविष्य लगातार एक-दूसरे से जुड़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने चुनौती केवल मौजूदा संकटों से निपटना नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना भी है जो भविष्य के संकटों से देशों की रक्षा करे और अधिक न्यायपूर्ण दुनिया का निर्माण करे। आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए पेजेश्कियान ने कहा कि सीमित वित्तीय और व्यापारिक व्यवस्थाओं पर अत्यधिक निर्भरता ने अर्थव्यवस्थाओं को राजनीतिक झटकों के प्रति कमजोर बना दिया है।
अमेरिकी प्रतिबंधों पर ईरानी राष्ट्रपति ने की किस चीज की वकालत?
उन्होंने कहा कि एकतरफा प्रतिबंध खाद्य सुरक्षा और लोगों के कल्याण को सीधे प्रभावित करते हैं। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और नए विकास बैंक को मजबूत करने की वकालत की, ताकि सदस्य देशों की आर्थिक मजबूती बढ़ाई जा सके। गाजा और लेबनान की स्थिति का जिक्र करते हुए पेजेश्कियान ने कहा कि क्षेत्र के लोग लगातार 'अपराधों और नरसंहार' के परिणाम भुगत रहे हैं। उन्होंने ब्रिक्स से राष्ट्रीय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और बल प्रयोग पर रोक के सिद्धांतों की रक्षा में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी देश अकेले इनका समाधान नहीं कर सकता। उन्होंने वैश्विक दक्षिण की क्षमताओं को साझा क्षमताओं में बदलने की अपील की। पेजेश्कियान ने ईरान की भौगोलिक स्थिति तथा उसकी ऊर्जा और परिवहन क्षमताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इनका इस्तेमाल ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और ऊर्जा गलियारों के विकास में योगदान के लिए किया जा सकता है।