ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी के साथ जिनपिंग-पुतिन के हल्के पल।
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2. राष्ट्राध्यक्षों का किया स्वागत, सभी को कार्यक्रम स्थल तक छोड़ा
पीएम मोदी ने तमिलनाडु के रामनाथस्वामी मंदिर के बैकग्राउंड वाले स्वागत स्थल पर सभी नेताओं से हाथ मिलाया। थ्री-डी अंदाज में बैकग्राउंड में दिख रहे इस मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना है। इसके 10वीं सदी में एक साधु के संरक्षण में होने की बात सामने आती है। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और दक्षिण में मौजूद इकलौता ज्योतिर्लिंग है।
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3. सिर्फ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति से गले मिले पीएम मोदी
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने लगभग सभी नेताओं का स्वागत हाथ मिलाकर ही किया। हालांकि, जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वागत स्थल पर पहुंचे तो पीएम मोदी ने गले लगाकर उनका अभिवादन किया।
4. पुतिन के साथ की कदमताल
पीएम मोदी ने पुतिन का भी गर्मजोशी से स्वागत किया। रूसी राष्ट्रपति अपने चिर-परिचित अंदाज में तेजी से भारत मंडपम के गेट से स्वागत स्थल तक पहुंचे। इस दौरान हाथ मिलाने के बाद पीएम मोदी ने उन्हें कदम से कदम मिलाकर कार्यक्रम स्थल तक छोड़ा। पुतिन और पीएम मोदी के बीच काफी सहजता और मुस्कुराहट भरी बॉन्डिंग दिखी। दोनों नेता एक साथ चलते हुए, मुस्कुराते हुए और आपस में जीवंत चर्चा करते नजर आए।
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ब्रिक्स सम्मेलन में ईरान-यूएई को एक मंच पर लाए पीएम मोदी।
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6. ईरान-यूएई को एक मंच पर लाए, बराबर दी तवज्जो
डॉ. पांडेय के मुताबिक, ईरानी राष्ट्रपति का पीएम मोदी का हाथ पकड़े दिखना दर्शाता है कि बाहरी दबावों के बावजूद वे सहज भाव से पीएम मोदी से मिल सकते हैं और भारत अपने पारंपरिक व ऐतिहासिक संबंधों को स्वतंत्रता और मजबूती के साथ बनाए रख रहा है।
ईरान के हमले झेलने वाले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी ब्रिक्स के लिए अपने प्रतिनिधि के तौर पर अबुधाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयन को भी भेजा। उन्हें और ईरान के राष्ट्रपति को एक ही मंच पर लाना एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि और उच्च सांकेतिक मूल्य वाला पल रहा, जो भारत के मध्यस्थता कौशल को दर्शाता है।