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BRICS NSA Meeting: जटिल चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स की भूमिका अहम; भारत ने US-ईरान समझौते का किया स्वागत

Tue, 23 Jun 2026 12:45 PM IST
अमन तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में अजीत डोभाल ने अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत करते हुए इसे ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिए सकारात्मक बताया। इसके साथ ही उन्होंने ब्रिक्स को वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए बेहद अहम बताया और आतंकवाद व साइबर खतरों के खिलाफ साझा प्रयासों पर जोर दिया।
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16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौते (MoU) का स्वागत किया और इसे दुनिया के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।
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अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत
अजीत डोभाल ने कहा कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति को लेकर सावधानी के साथ सकारात्मक उम्मीद रखता है। उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि यह समझौता सही तरीके से काम करेगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा को बहुत मदद मिलेगी। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के खुलने को एक बड़ी राहत बताया। डोभाल के अनुसार, इस समुद्री रास्ते के खुलने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आने वाली रुकावटें दूर होंगी। इससे खाद और रसायनों जैसी जरूरी चीजों की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि समुद्री आवाजाही की आजादी से क्षेत्र के देशों की आर्थिक समृद्धि में सुधार होगा।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पहले इस शांति वार्ता का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया के संघर्ष ने दुनिया भर में आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई थी कि इस समझौते से क्षेत्र में शांति बहाल होगी और व्यापार सुरक्षित होगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस बातचीत को बहुत सफल बताया है।

ब्रिक्स की बढ़ती ताकत और जिम्मेदारी
बैठक में एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि ब्रिक्स (BRICS) केवल देशों का समूह नहीं है। ये दुनिया की लगभग आधी आबादी का एक साझा घर है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया अस्थिरता और तनाव का सामना कर रही है, तब ब्रिक्स की भूमिका बहुत खास हो जाती है।

आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों में 3.9 अरब लोग रहते हैं, जो दुनिया की कुल आबादी का लगभग 49 प्रतिशत है। यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था में 30 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान देता है। डोभाल ने कहा कि ब्रिक्स का मकसद एक ऐसी दुनिया बनाना है जहां सबकी आवाज सुनी जाए और विकासशील देशों के हितों की रक्षा हो सके।

सुरक्षा चुनौतियां और आतंकवाद पर चिंता
एनएसए डोभाल ने मौजूदा वैश्विक हालात को काफी मुश्किल बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय सैन्य संघर्षों, आर्थिक दबाव और बदलती तकनीक की चुनौतियों से जूझ रही है। उन्होंने चिंता जताई कि पुरानी संस्थाएं और नियम इन झगड़ों को सुलझाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

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उन्होंने गैर-पारंपरिक खतरों को लेकर भी आगाह किया। डोभाल ने कहा कि आतंकवाद के नए और छिपे हुए रूप, साइबर हमले और खतरनाक तकनीक अब देशों की सीमाओं को पार कर चुके हैं। इनसे निपटने के लिए पुराने तरीके अब काफी नहीं हैं। उन्होंने ब्रिक्स देशों से अपील की कि वे इन खतरों के प्रति सतर्क रहें और मिलकर इनका मुकाबला करें।

बैठक में आतंकवाद विरोधी रणनीतियों और सूचना तकनीक के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। भारत इस समय ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की अध्यक्षता कर रहा है। इसमें सदस्य देशों के शीर्ष अधिकारी वैश्विक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रणनीतियां बना रहे हैं। डोभाल ने सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।
 
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