मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क के खिलाफ साझा मोर्चा बनाते हुए ब्रिक्स देशों ने मंगलवार को 'गुवाहाटी घोषणा-पत्र' अपनाया। दो दिवसीय बैठक के समापन पर सदस्य देशों ने सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और नए उभरते खतरों से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई, रियल टाइम खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान तथा आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग पर सहमति जताई।
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित इस बैठक का विषय लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास रहा। इसमें ब्राजील, चीन, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस और संयुक्त अरब अमीरात की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुखों ने भाग लिया। बैठक में कहा गया कि मादक पदार्थों की तस्करी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है।
सिंथेटिक ड्रग्स, नए मनो-सक्रिय मादक पदार्थ (एनपीएस), प्रीकर्सर रसायनों के दुरुपयोग, डार्कनेट, डिजिटल मंचों, वर्चुअल परिसंपत्तियों और समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में सदस्य देशों के बीच तेज, भरोसेमंद और प्रभावी सहयोग पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।
गुवाहाटी घोषणा-पत्र में सदस्य देशों ने राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप खुफिया जानकारी, आवश्यक सूचनाओं और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के समयबद्ध आदान-प्रदान पर सहमति व्यक्त की। साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, डिजिटल उपकरणों और आंकड़ा आधारित निगरानी प्रणाली के अधिक उपयोग पर जोर दिया गया।
बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने किया। उन्होंने कहा कि भारत ने मादक पदार्थों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है और वर्ष 2026 से 2029 तक के लिए नेटवर्क आधारित तीन वर्षीय कार्ययोजना तैयार की है। इस रणनीति का उद्देश्य केवल तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पूरे अपराध नेटवर्क को ध्वस्त करना, जन-जागरूकता के माध्यम से नशे की रोकथाम करना तथा उपचार, नशा मुक्ति और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत बनाना है।
अनुराग गर्ग ने कहा कि 21वीं सदी में मादक पदार्थों की तस्करी पूरी तरह हाइपर-कनेक्टेड हो चुकी है और इसकी कोई भौगोलिक सीमा नहीं रह गई है। इसलिए विभिन्न देशों की एजेंसियों को भी आपसी सहयोग का मजबूत नेटवर्क तैयार कर इन अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोहों के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच वर्चुअल कार्य समूह गठित करने और सीमा पार संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा।
बैठक के दौरान सदस्य देशों ने अपने-अपने देशों में मादक पदार्थों की स्थिति की समीक्षा की। डार्कनेट के माध्यम से हो रही तस्करी, सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे, प्रीकर्सर रसायनों की अवैध आपूर्ति रोकने और डिजिटल तकनीक के जरिए तस्करी पर अंकुश लगाने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। गुवाहाटी घोषणा-पत्र में इस बात पर भी विशेष बल दिया गया कि मादक पदार्थों की मांग कम करने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जन-केंद्रित रणनीति अपनाई जाए। बच्चों और युवाओं को नशे की लत से बचाने, स्वस्थ जीवनशैली को
बढ़ावा देने तथा उपचार, नशा मुक्ति और पुनर्वास सेवाओं को और प्रभावी बनाने पर भी सदस्य देशों ने सहमति व्यक्त की। बैठक के अंत में सभी देशों ने मादक पदार्थों से मुक्त, सुरक्षित और स्वस्थ विश्व के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का संकल्प दोहराया।
गुवाहाटी घोषणा-पत्र की प्रमुख बातें
- सीमा पार रियल टाइम खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान पर सहमति।
- सिंथेटिक ड्रग्स और नए मनो-सक्रिय मादक पदार्थों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई।
- डार्कनेट, डिजिटल मंचों, वर्चुअल परिसंपत्तियों और समुद्री मार्गों के दुरुपयोग पर निगरानी।
- प्रीकर्सर रसायनों की अवैध आपूर्ति रोकने के लिए साझा रणनीति।
- बच्चों और युवाओं को नशे से बचाने, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने तथा उपचार और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत करने पर जोर।
- भारत का ब्रिक्स वर्चुअल कार्य समूह और सीमा पार संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव।
- राष्ट्रीय कानूनों और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप सहयोग बढ़ाने पर सहमति।