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ब्रिक्स: भारत की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी, चार बजे तक चली बातचीत के बाद संयुक्त बयान पर सहमति; कैसे माने 11 देश?

Sat, 12 Sep 2026 03:51 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। देर रात से सुबह 4 बजे तक चली गहन बातचीत के बाद 11 सदस्य देशों ने संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति बना ली। खास बात यह रही कि ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे अलग-अलग मत रखने वाले देश भी एक मंच पर सहमत हुए। आखिर भारत ने यह मुश्किल सहमति कैसे बनाई और इसका क्या महत्व है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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ब्रिक्स 2026 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत से पहले भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कई संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद ब्रिक्स देशों ने संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति बना ली है। यह सहमति आसान नहीं थी, क्योंकि अलग-अलग देशों के बीच कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर अलग राय थी। भारत की लगातार बातचीत और सदस्य देशों के बीच समन्वय के बाद आखिरकार संयुक्त बयान के लिए रास्ता साफ हो गया।

बातचीत में कैसे बनी सहमति?

सरकारी सूत्रों के अनुसार, संयुक्त बयान को लेकर बातचीत शुक्रवार देर रात तक जारी रही और यह चर्चा शनिवार सुबह करीब 4 बजे तक चली। कई ऐसे मुद्दे थे जिन पर सदस्य देशों के बीच मतभेद बने हुए थे। भारत ने सभी देशों के साथ लगातार बातचीत कर उनकी अलग-अलग चिंताओं को समझने और साझा सहमति बनाने की कोशिश की। इसी गहन कूटनीतिक प्रक्रिया के बाद सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान को लेकर आम राय बन सकी। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ब्रिक्स जैसे बड़े मंच पर सभी देशों की सहमति बनाना हमेशा एक जटिल प्रक्रिया होती है।

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सभी देशों में सहमति क्यों चुनौती थी?

  • ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात तीनों ब्रिक्स के सदस्य हैं।
  • इन देशों के बीच कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर गहरे मतभेद रहे हैं।
  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़े हुए तनाव के बीच साझा बयान पर सहमति बनाना कठिन चुनौती थी।
  • सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत की मध्यस्थता और निरंतर परामर्श ने मतभेदों को ब्रिक्स प्रक्रिया पर हावी नहीं होने दिया।
  • इसी सहमति के बाद संयुक्त बयान जारी करने का रास्ता तैयार हुआ।

 

इसे कूटनीतिक सफलता क्यों माना जा रहा है?

सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत ने अलग-अलग देशों के बीच प्रतिस्पर्धी रुख और संवेदनशील मुद्दों के बावजूद ब्रिक्स की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कई देशों के हित और दृष्टिकोण अलग-अलग हैं, लेकिन इसके बावजूद संयुक्त बयान पर सहमति बनना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की मेजबानी कर रहा है और उसकी कोशिश रही कि सभी सदस्य देश साझा एजेंडे पर एक साथ आगे बढ़ें। सूत्रों के मुताबिक, भारत की इसी सक्रिय भूमिका ने बातचीत को सफल अंजाम तक पहुंचाया।

ब्रिक्स में कौन-कौन देश शामिल हो रहे हैं?

भारत 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस सम्मेलन में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों के नेताओं के साथ 10 पार्टनर देशों और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत कई प्रमुख नेता हिस्सा ले रहे हैं। इतने बड़े स्तर पर आयोजित यह सम्मेलन राजनीतिक, आर्थिक और वैश्विक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है।

संयुक्त बयान का महत्व क्या है?

ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त बयान पर बनी सहमति सम्मेलन के लिए एक मजबूत शुरुआत मानी जा रही है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यदि सदस्य देश साझा बयान पर सहमत हैं तो इसका मतलब है कि कई कठिन मुद्दों पर संवाद के जरिए एक साझा रास्ता निकाला गया है। भारत की मेजबानी में हो रहे इस दो दिवसीय सम्मेलन में अब 11 सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों के बीच विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर आगे की चर्चा होगी। संयुक्त बयान जारी होने से पहले बनी यह सहमति भारत के लिए कूटनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।

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