ड्रग तस्करी के बदलते स्वरूप और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को देखते हुए भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच एक स्थायी वर्चुअल वर्किंग ग्रुप बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का उद्देश्य वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करना, तस्करी के नए तरीकों का विश्लेषण करना और संयुक्त कार्रवाई के लिए बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
ड्रग तस्करी के आधुनिक तरीकों के चलते यह समस्या वैश्विक खतरा बन गई है। इसे देखते हुए भारत ने इससे निपटने के लिए ब्रिक्स देशों का एक खास वर्चुअल वर्किंग ग्रुप बनाने कर प्रस्ताव रखा है। वहीं ब्रिक्स सदस्य देशों ने इस समस्या से मिलकर निपटने पर जोर दिया।
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ब्रिक्स सदस्य देशों की ड्रग तस्करी के खिलाफ काम करने वाली एजेंसियों के प्रमुखों की दो दिवसीय बैठक के उद्घाटन समारोह में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के महानिदेशक अनुराग गर्ग ने कहा कि ड्रग तस्करी के आधुनिक तरीकों के सामने आने से यह समस्या वैश्विक खतरा बन गई है। ड्रग तस्करी जो कभी एक इलाके तक सीमित थी, अब व्यापक स्तर पर वैश्विक चुनौती बन गई है।
उन्होंने कहा, इससे निपटने के लिए एक समर्पित ब्रिक्स वर्चुअल वर्किंग ग्रुप बनाने का प्रस्ताव रखता हूं। यह व्यवस्था नियमित रूप से मिलने, रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा करने, तस्करी के बदलते तरीकों का विश्लेषण करने और कानून लागू करने वाले संयुक्त प्रवर्तन अभियानों में आसानी से तालमेल बिठाने के लिए एक अहम मंच का काम करेगी। गर्ग ने कहा, 21वीं सदी में ड्रग तस्करी की सच्चाई बहुत कठोर है। अपराधी नेटवर्क सीमाओं की परवाह नहीं करते, वे संप्रभुता को नहीं मानते और वे सरकारी मंजूरी का इंतजार नहीं करते।
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नशा मुक्त समाज के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
गर्ग ने विशेष सीमा-पार प्रशिक्षण कार्यक्रम और सदस्य एजेंसियों के बीच बेहतरीन तौर-तरीकों को लगातार साझा कर फ्रंटलाइन अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विशाल ब्रिक्स परिवार के तौर पर, हमारे पास दुनिया को हकीकत में बदलने व नशा-मुक्त समाज के विजन को वास्तविकता में बदलने की सामूहिक ताकत है। यह समूह वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े और सबसे असरदार सहयोगों में से एक बन गया है।
इन क्षेत्रों पर फोकस : बैठक तीन अहम क्षेत्रों पर केंद्रित रही। सिंथेटिक ड्रग्स और प्रीकर्सर के गलत इस्तेमाल को रोकना, खुफिया जानकारी साझा करने और ऑपरेशनल तालमेल को मजबूत करना तथा क्षमता निर्माण व संस्थागत सहयोग बढ़ाना।