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Congress: कांग्रेस ने ट्रांसजेंडर विधेयक का किया विरोध, राहुल गांधी बोले- यह सांविधानिक अधिकारों पर सीधा हमला

Tue, 24 Mar 2026 05:13 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

Congress: कांग्रेस ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन विधेयक का विरोध किया है। सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे ट्रांसजेंडर समुदाय के सांविधानिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया। कांग्रेस नेता ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-
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राहुल गांधी, कांग्रेस नेता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार की ओर से लाया गया ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक सांविधानिक अधिकारों और ट्रांसजेंडर लोगों की पहचान पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस विधेयक का पूरी तरह विरोध करती है। 
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि प्रस्तावित कानून ट्रांसजेंडर लोगों के मूल अधिकारों को कमजोर करता है। उन्होंने कहा, भाजपा सरकार का ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों के सांविधनिक अधिकारों और पहचान पर खुला हमला है। उन्होंने लिखा कि यह विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों की खुद की पहचान का अधिकार छीन लेता है, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है।  

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह विधेयक भारत में ट्रांसजेंडर समुदायों की विविध सांस्कृतिक पहचान को खत्म करता है और लोगों को मेडिकल बोर्ड के सामने 'अमानवीय जांच' से गुजरने के लिए मजबूर करता है। राहुल गांधी ने उन प्रावधानों की भी आलोचना की, जिनमें उनके अनुसार बिना पर्याप्त सुरक्षा के आपराधिक दंड और निगरानी की व्यवस्था की गई है।
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कांग्रेस नेता ने दावा किया कि सरकार ने इस विधेयक को लाने से पहले ट्रांसजेंडर समुदाय से कोई परामर्श नहीं किया और ऐसा विधेयक लाई है, जो उनकी सुरक्षा के बजाय उन्हें कलंकित करता है। उन्होंने आगे कहा, संविधान प्रत्येक भारतीय के जीवन, स्वतंत्रता, पहचान और गरिमा के अधिकार की रक्षा करता है। भाजपा सरकार अपने संकीर्ण विचारों के लिए संविधान का उल्लंघन कर रही है और ट्रांसजेंडर समुदाय का सम्मान करने के भारत के इतिहास को नष्ट कर रही है। 

संसद में किसने पेश किया विधेयक?
संसद में यह विधेयक हाल ही में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने पेश किया है। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि यह विधेयक ट्रांसजेंडर पहचान की परिभाषा को सीमित करता है और कानूनी मान्यता के लिए अतिरिक्त प्रक्रियाएं जोड़ता है। 

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कानूनी विशेषज्ञों ने ट्रांसजेंडर विधेयक पर क्या कहा? 
कोलकाता में ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों और कानूनी विशेषज्ञों ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि यह ट्रांसजेंडर लोगों के खुद की पहचान तय करने के अधिकार को सीमित कर सकता है।
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कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रस्तावित कानून राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक फैसले से अलग है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने बिना किसी अनिवार्य मेडिकल जांच के अपनी लैंगिक पहचान तय करने के अधिकार को मान्यता दी थी। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि आखिर ट्रांसजेंडर समुदाय को ही अपनी पहचान साबित करने के लिए सबूत क्यों देना पड़ता है, जबकि पुरुष और महिला के मामले में ऐसा नहीं होता।

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