देश के उत्तर पूर्वी राज्यों को बाढ़ और मृदा कटाव से बचाने के लिए ब्रह्मपुत्र बोर्ड ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत उत्तर पूर्वी राज्यों में फैले 15 नदी उप-घाटियों में बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा। इस योजना से उत्तर पूर्वी राज्यों को लंबे समय तक बाढ़ और मिट्टी के कटाव जैसी समस्या से निजात मिलेगी।
पूर्वोत्तर भारत में विनाशकारी बाढ़ ने मचाई थी तबाही
इस साल जून में, पूर्वोत्तर भारत में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई, जिससे असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, त्रिपुरा और मणिपुर में लाखों लोग प्रभावित हुए। रिकॉर्ड तोड़ बारिश के चलते कई तटबंध टूट गए और उससे बाढ़ आई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, असम के सिलचर में एक दिन में 415.8 मिमी बारिश हुई और अकेले मिजोरम में 600 से ज्यादा भूस्खलन हुए।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'ब्रह्मपुत्र बोर्ड मास्टर प्लान तैयार करने, परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने, बाढ़ प्रबंधन और सीमा क्षेत्र कार्यक्रम (एफएमबीएपी) योजनाओं की निगरानी करने और कटाव-रोधी, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निकासी, समग्र जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देने जैसे कामों को लागू करने के लिए सक्रिय रूप से जुटा है।' फिलहाल बोर्ड जिन नदी उप-बेसिनों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है उनमें दिखो और झांजी (नागालैंड और असम), डिक्रोंग (अरुणाचल प्रदेश और असम), कोलोडाइन और तुइचांग (मिजोरम) जैसी नदियां और मेघालय की 10 नदियां, जिनमें किंशी, उमंगोट और सिमसांग आदि शामिल हैं।
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बोर्ड में शामिल हैं इन संस्थाओं के प्रतिनिधि
राज्य सरकार के प्रतिनिधियों, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी), उत्तर पूर्व अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एनईएसएसी), भारतीय सर्वेक्षण विभाग, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों वाली एक विशेष समिति मास्टर प्लान तैयार करने में जुटी है। 15 उप-घाटियों के अलावा, संकोश-रैदक, तीस्ता, गनोल, जिंजीराम, उमटरू, कोपिली, कोलोंग, धनसिरी (उत्तर), तंगनी, नोआनाडी, नानोई, बरनाडी, फेनी, मुहुरी और गुमटी जैसी प्रमुख नदियों के लिए भी भविष्य के मास्टर प्लान प्रस्तावित किए गए हैं।