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दोस्त ने पहले पिलाई शराब, बेहोश होने पर चंद पैसों के लिए कराई नसबंदी

Fri, 29 Jul 2016 01:02 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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बरेली. शहर में शराब के नशे में बेहोश युवक की नसबंदी का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक ने बारादरी थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी युवक से थाने में पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया।
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बताया जा रहा है कि ऐसे ही दो मामले और हैं जिसकी शिकायत पुलिस को नहीं की गई है। 

आरोप है कि एक एनजीओ ने अपने आंकड़े बढ़ाने के लिए वारदात को अंजाम दिया है। पीड़ित एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। उसकी मां ने बताया कि बेटे ने अपने दो दोस्तों के साथ शराब पी। ज्यादा नशा होने पर एक दोस्त रोहित उसे नसबंदी करने वाली संस्था के क्लीनिक पर ले गया और उसकी नसबंद करा दी। इसकी जानकारी उसे एक दिन बाद हुई।

पीड़ित ने वकील के माध्यम से बारादरी थाने में 22 जुलाई को रोहित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। युवक की मां का कहना है कि रोहित दो अन्य कुंवारे लड़कों की नसबंदी करा चुका है। लेकिन वे दोनों सामने नहीं आ रहे हैं इसलिए तहरीर में उनके नाम नहीं दिए गए हैं।
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पीड़ित ने अभी सीएमओ कार्यालय में शिकायत दर्ज नहीं कराई है, लेकिन पुलिस अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है।
 
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जिले में इस साल नसबंदी में पिछले साल के मुकाबले आधे केस भी नहीं हुए। इससे नसबंदी कराने के काम में लगी संस्था भी सवालों के घेरे में हैं। पिछले साल जिले में 533 पुरुषों और 975 महिलाओं की नसबंदी हुई थी। लेकिन, इस बार यह संख्या मात्र 47 और 742 है।

नसबंदी के लिए पुरुषों को लाने वालों को एनजीओ एक हजार रुपए देती है, जोकि कागजों में दर्ज नहीं होता है। आशा और एएनएम जिन्हें नसबंदी के लिए लाते हैं उन्हें सरकार की ओर से 400 से 600 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। माना जा रहा है कि इन्हीं रुपए की लालच में रोहित नसबंदी रैकेट से जुड़ गया।
 
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धोखे से नसबंदी कराने वाले युवक के परिवार द्वारा कार्रवाई किए जाने के बाद संस्था ने भरोसा दिलाया है कि वह फिर से ठीक हो जाएगा। बताया गया है कि 15 दिन बाद उसकी नसबंदी खोल दी जाएगी।

इस मामले में संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुभोध शर्मा ने कहा कि शासन ने पहले ही आशंका जताई थी कि पिछले साल की तुलना में इस बार पुरुष नसबंदी कम कैसे हुई। यह मामला वाकई गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी।
 
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