केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को कहा कि देश की सीमा से सटे इलाके, जिनकी पहले अनदेखी की गई थी। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शीर्ष प्राथमिकता बन गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सीमाई इलाकों में विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
किरेन रिजिजू ने एक्स पर क्या पोस्ट किया?
किरेन रिजिजू ने एक्स पर अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों माजा, गालेमो और तक्सिंग के दौरे का एक वीडियो भी पोस्ट किया। वीडियो में बुनियादी ढांचे के काम के लिए मशीनें चलती दिखीं। केंद्रीय मंत्री ने सेना के जवानों और स्थानीय लोगों से बातचीत की। वीडियो में दुर्गम और ऊबड़-खाबड़ हिमालयी इलाका भी दिखा जो सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है।
किरेन रिजिजू ने क्या कहा?
एक्स पर पोस्ट करते हुए किरेन रिजिजू ने लिखा, 'कुछ लोग सीमा को लेकर लापरवाही से टिप्पणी कर देते हैं। सीमाई क्षेत्र मुश्किल हैं, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार सीमा के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मैं अरुणाचल प्रदेश के माजा, गालेमो, तक्सिंग इलाकों में गया ताकि बुनियादी ढांचे के काम तेज किए जा सकें। पहले सीमाओं की अनदेखी हुई थी लेकिन अब यह शीर्ष प्राथमिकता है।'
नेता प्रतिपक्ष के दावे को किया खारिज
केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी नेता लगातार आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार चीनी घुसपैठ की जानकारी छिपा रही है। सीमा पर भारतीय क्षेत्र की ठीक से रक्षा नहीं कर रही है।इससे पहले बुधवार को आईएएनएस से विशेष बातचीत में किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस दावे को खारिज किया।
उन्होंने कहा, 'ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर मुद्दे हैं। इन मुद्दों की जड़ को समझने की जरूरत है। अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की बहुत लंबी सीमा है जिसे औपचारिक रूप से तय नहीं किया गया है। वहां कोई सीमा स्तंभ नहीं हैं और जमीन पर सीमा रेखा साफ नहीं है। यह कोई नई बात नहीं है। जब तिब्बत एक अलग इकाई था, तब भी तिब्बत और भारत के बीच सीमा तय नहीं थी।'
मंत्री ने किस पर चिंता जताई?
उन्होंने कहा, 'लोगों के लिए अलग-अलग वीडियो शेयर करके भ्रम फैलाना गलत है। सीमा को लेकर वाकई एक मुद्दा है। अरुणाचल प्रदेश के कुछ ग्रामीणों ने सीमा को लेकर चिंता जताई है। यह सही भी है, क्योंकि वहां सीमा तय नहीं है।'
केंद्नीय मंत्री ने बताया कि इस इलाके की दुर्गम जमीन के कारण पहले यहां स्थायी बसावट कम थी। इन इलाकों का इस्तेमाल पहले शिकार और चराई के लिए होता था, रहने के लिए नहीं। सीमा तय न होने के कारण भारत और चीन के बीच लंबे समय से तनाव रहा है।
चीन पर क्या आरोप लगाया?
रिजिजू के मुताबिक मुद्दे की जड़ सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार से भी जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने बहुत पहले सड़कें और अन्य ढांचा बनाना शुरू कर दिया था, जबकि कांग्रेस की सरकारों ने अलग नीति अपनाई।
रिजिजू ने दावा किया कि 2014 में मोदी सरकार आने के बाद स्थिति बदली। सरकार ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सीमा इलाकों में सड़क और कनेक्टिविटी पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, 'पीएम मोदी ने नीति बदली और अब हमारी तरफ भी सड़कें बन रही हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से माजा गया, जो अंतिम सीमा बिंदु पर स्थित गांव है। वहां सीमा बल के जवानों और सैनिकों से मिला। सड़क का काम पूरा हो गया है। 1947 के बाद से आज तक सीमा पर कोई सड़क नहीं बनी थी। पीएम मोदी के नेतृत्व में हमने सड़क बनवाई।'