गुवाहाटी फ्रंटियर पर जितने भी गांव बॉर्डर एरिया में लगते हैं, वहां सभी में कोरोना को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। बल के पीआरओ वीएन पाराशर का कहना है कि यहां की अधिकांश आबादी पढ़ी-लिखी नहीं है।
लोग खेतों में या दूसरी जगहों पर मजदूरी कर अपना पेट भरते हैं। दूर तक खुला इलाका है। यहां दिक्कत यह होती है कि आसपास के इलाकों में रह रहे लोग खेत खलियान या जंगल के द्वारा यहां आ जाते हैं। ऐसे में कोरोना के संक्रमण का खतरा बना रहता है।
इसके लिए कई तरह से काम कर रहे हैं। पहले, लोगों को चेक पोस्ट पर जब राशन वितरित किया जाता है तो उन्हें समझाते हैं कि कोरोना से कैसे बचना है। फिर घूम-घूम कर जागरूकता का काम करते हैं।
पीआरओ पाराशर के अनुसार, पिछले कई दिनों से भारत बांग्लादेश के सीमावर्ती जिले, दक्षिण सलमरा, धुबरी और कूचबिहार में जिप्सी पर लाउड स्पीकर लगाकर बीएसएफ जवान हर इलाके में पहुंच रहे हैं।
कोरोना के बारे में लोगों को अच्छी तरह से मालूम हो जाए, इसलिए उन्हीं की भाषा में टेप तैयार कराया है। कई बार स्थानीय जवान भी यह जिम्मेदारी निभाते हैं। ग्रामीणों को सबसे पहले मास्क प्रदान किया जाता है। उसके बाद उन्हें सामाजिक दूरी का महत्व समझाते हैं।
उस इलाके में बाहर से कोई व्यक्ति आया है, तो उसकी जानकारी तुरंत स्थानीय प्रशासन को देना, जैसी बातें लोगों को समझाते हैं। सीमावर्ती गांव जोराधराला, दरीवास, दिनहाटा और साहेबगंज सहित कई इलाकों में सैनिटाइज करने के तरीके बताए गए हैं।
बीएसएफ ने अपने स्तर पर कई इलाकों को सैनिटाइज किया है। पाराशर बताते हैं कि इन सबके बीच जवानों को बॉर्डर ड्यूटी भी देनी है। वहां का रोटेशन खत्म होने के बाद हमारे जवान अपनी बैरक में नहीं जाते। वे गांवों में जाकर लोगों को राशन वितरित करते हैं।