भारत और चीन के सैनिकों के बीच लद्दाख में तनातनी बनी हुई है। इस बीच ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त बैरी ओ फ्रेल ने चीन के गतिरोध पर कहा, भारत और चीन को द्विपक्षीय वार्ता के जरिये मुद्दे को सुलझाना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया या किसी अन्य देश को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत संबंधों पर एक जैसी मानसिकता वाले दो लोकतांत्रिक देशों का मिलकर काम करना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार दक्षिण चीन सागर में बढ़ती चीन की मुखरता से चिंतित है और साथ ही चीन ने अपने नागरिकों के व्यापक विरोध के बावजूद हांगकांग में एक सुरक्षा कानून लागू करने की योजना बनाई है।
फ्रेल ने चार जून को पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मॉरिसन के बीच होने वाली वीडियो कांफ्रेंसिंग पर कहा कि इस द्विपक्षीय वार्ता का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना होगा।
कांग्रेस ने चीनी सेना की भारतीय सीमा में घुसपैठ पर मोदी सरकार से पूछा है कि वह इस पर मौन क्यों बैठी है। उसने कहा कि सरकार ने हालात पर देश की जनता के साथ विवरण साझा क्यों नहीं किया। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि भारत की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। चीनी सेना भारतीय सीमा में घुसपैठ समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी हुई है।
उन्होंने मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कहा कि चीनी सेना ने गलवान वैली और पैंगोंग झील इलाके में अतिक्रमण का दुस्साहस किया है। सुरजेवाला ने कहा है कि हालांकि सरकार ने इस संकट को कूटनीतिक तौर पर सुलझाने के संबंध में बयान दिया है, लेकिन सरकार को भारत-चीन सीमा पर पूर्व की स्थिति बहाल करने के बारे में देश के नागरिकों एवं सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना चाहिए।