भारत और चीन की सेनाओं के कोर कमांडरों ने रविवार को अरुणाचल प्रदेश वाचा-दमाई सीमा बैठक स्थल पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए बैठक की। यह कोर कमांडर स्तरीय बातचीत ऐसे समय हुई है जब राज्य के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच तनाव की खबरें सामने आई थीं।
गौरतलब है कि इस वार्ता से पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता हुई थी। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार आनंद कुमार इसे महत्वपूर्ण घटना मानते हुए कहते हैं, 'खास बात यह है कि बातचीत अब केवल सीमा पर तनाव को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण में ‘शीघ्र और ठोस प्रगति’ की बात भी की है।'
क्या हालिया वार्ताओं से संबंधों के नए चरण की शुरुआत?
सामरिक औऱ सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ आनंद कुमार मानते हैं कि भारत और चीन के संबंध एक बार फिर ऐसे मोड़ पर हैं, जहां वर्षों की सैन्य तनातनी, कूटनीतिक अविश्वास और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लंबे गतिरोध के बाद दोनों देश संबंधों को स्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। आनंद कुमार के मुताबिक भारत-चीन के बीच सीमा समाधान की राह लंबी और कठिन है। फिर भी, यदि वर्तमान गति बनी रहती है और ‘अर्ली हार्वेस्ट’ को स्पष्ट उद्देश्य, समय-सीमा और ठोस विषयवस्तु मिलती है, तो हालिया वार्ताएं संबंधों में एक नए चरण की शुरुआत कर सकती हैं। वास्तविक सफलता सामान्य दिखने वाले संबंध नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था होगी, जिसमें एलएसी पर शांति और एक स्वीकार्य सीमा समाधान की दिशा में प्रगति एक-दूसरे को मजबूत करें।