बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोहराबुद्दीन शेख फेक एनकाउंटर मामले में गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी डी जी बंजारा और चार अन्य को निचली अदालत द्वारा आरोप मुक्त करने का फैसला बरकरार रखा है। जो उन अधिकारियों की रिहाई को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया है।
मामले पर सीबीआई का कहना है कि साल 2005 में सोहराबुद्दीन और उनकी पत्नी एक फेक एनकाउंटर में मारे गए थे। सीबीआई ने ये भी कहा कि इसके एक साल बाद ही गुजरात और राजस्थान की पुलिस ने कथित तौर पर उनके सहयोगी तुलसी प्रजापति की हत्या भी साजिश के तहत कर दी थी।
बता दें इस मामले में निचली अदालत ने पुलिस अधिकारियों को बरी कर दिया था। कोर्ट के उस फैसले को बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। इसके अलावा हाई कोर्ट ने गुजरात के आईपीएस अधिकारी विपुल अग्रवाल को भी बरी कर दिया। उन्हें बरी किए जाने वाली याचिका को निचली अदालत ने पहले ही खारिज कर दिया था। मामले में सीबीआई ने पुलिस अधिकारियों समेत 33 अन्य लोगों को आरोपी ठहराया था। गौरतलब है कि दंपत्ती को मारने के बाद गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि उनके संबंध आतंकवादियों से थे।