महाराष्ट्र के इंस्पेक्टर ऑफ प्रीजन और करेक्शनल सर्विसेज ने सितंबर में अपनी रिपोर्ट में बताया है कि राज्य की 39 जेलों के लिए 329 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट मंजूर हैं, जिनमें से 291 चालू स्थिति में हैं।
बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर विचाराधीन कैदियों को कोर्ट में सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश करने की मांग की है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी इसका समर्थन किया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक संभव हो, तब तक विचाराधीन कैदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट की सुनवाई में पेश किया जा सकता है क्योंकि कैदियों को शारीरिक रूप से कोर्ट में पेश करने में काफी संसाधन और वक्त लगता है।
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जस्टिस भारती डांगरे की एकल जज पीठ ने याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को इसके लिए जरूरी कदम उठाने और फंड मुहैया कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश बीती 10 नवंबर को दिया था, जिसकी विस्तृत जानकारी अब मुहैया कराई गई है। बता दें कि त्रिभुवनसिंह यादव ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विचाराधीन कैदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश करने की मांग की थी। कोर्ट ने अब सरकार से सभी अदालतों में स्क्रीन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं मुहैया कराने को कहा है।
वहीं महाराष्ट्र के इंस्पेक्टर ऑफ प्रीजन और करेक्शनल सर्विसेज ने सितंबर में अपनी रिपोर्ट में बताया है कि राज्य की 39 जेलों के लिए 329 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट मंजूर हैं, जिनमें से 291 चालू स्थिति में हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि कैदियों को शारीरिक रूप से कोर्ट में पेश करना काफी खर्चीला है और इसमें समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। कोर्ट ने ये भी कहा कि प्रत्येक विचाराधीन कैदी को तय तारीख पर कोर्ट में या तो शारीरिक रूप से या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश करना जरूरी है।
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बता दें कि हाईकोर्ट ने पहले भी वकील सत्यव्रत जोशी को नियुक्त कर यह पता लगाने की कोशिश की थी कि जेलों में कैदियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश करने के लिए कितनी सुविधाएं हैं। रिपोर्ट में पता चला कि जेलों में इसकी सुविधाएं तो मौजूद हैं लेकिन कई जगह खराब नेटवर्क और पर्याप्त तकनीशियनों की कमी एक बड़ी समस्या है। हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट को राज्य सरकार को भेजने और सरकार से इस पर कदम उठाने का निर्देश दिया है। कोर्ट अब 4 दिसंबर को इस मामले पर सुनवाई करेगा।