बॉम्बे हाईकोर्ट और मुंबई की एक स्थानीय अदालत ने गुरुवार को दो अहम मामलों की सुनवाई की। जहां एक मामले में मुंबई उच्च न्यायालय ने अवैध इमारतों से जुड़े मामले में सख्त टिप्पणी की है। वहीं, मुंबई कोर्ट ने शिवसेना सांसद और प्रवक्ता संजय राउत को राहत दी है।
क्या रही अवैध इमारत के मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को अवैध इमारतों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर तीखा बयान दिया। कोर्ट ने कहा कि वह अवैध इमारतों की वजह से एक भी मासूम की जान नहीं जाने देगी। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एमएस कार्णिक की बेंच ठाणे के तीन रहवासियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका के जरिए मांग की गई है कि मुंब्रा स्थित नौ अवैध बिल्डिंगों में लोग बस चुके हैं, लेकिन चूंकि उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा है, इसलिए उन्हें ध्वस्त किया जाए।
बेंच ने मामले में राज्य सरकार से पूछा कि 1998 के सरकारी प्रस्ताव, जिसे अभी भी लागू किया जा रहा है, उसके जरिए निगम अधिकारियों को मानसून के दौरान भी अवैध इमारतों को तोड़ने से किस बात ने रोका? कोर्ट ने पूछा कि क्या बारिश के दौरान किसी अवैध बिल्डिंग को तोड़ना क्या जोखिम भरा है? आखिर इस प्रस्ताव का मतलब क्या है?
संजय राउत को मानहानि के मामले में मिली राहत
इससे पहले शिवसेना सांसद संजय राउत को मानहानि केस में राहत मिली है। दरअसल, राउत के खिलाफ भाजपा नेता किरीट सोमैया की पत्नी मेधा सोमैया ने मानहानि का केस दायर कराया है। इस मामले में मुंबई की स्थानीय अदालत ने राउत को पेश होने का आदेश दिया था। हालांकि, जब राउत पेश नहीं हुए तो कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वॉरंट जारी किया था। आखिरकार गुरुवार को शिवसेना सांसद अपने वकीलों के साथ कोर्ट के सामने पेश हुए। इसे देखते हुए मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने राउत के खिलाफ जारी जमानती वॉरंट रद्द कर दिया।
इससे पहले अदालत ने समन जारी करते हुए कहा था कि पेश किए गए दस्तावेजों और वीडियो क्लिप से प्रथम दृष्टया यह पता चलता है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता (मेधा सोमैया) के खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए, ताकि ये अखबारों में छपे और लोग इन्हें पढ़ सकें। अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि राउत के कहे शब्दों ने शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है।
क्या हैं मेधा सोमैया के आरोप?
मेधा सोमैया ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि राउत ने उनके तथा उनके पति के खिलाफ बेबुनियाद और पूरी तरह अपमानजनक आरोप लगाए तथा उन पर मीरा भायंदर नगर निगम के अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले कुछ सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण और देखरेख में 100 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया।