बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को एनआईए को सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज की जमानत याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। एलगर परिषद-माओवादी जुड़ाव मामले की आरोपी सुधा भारद्वाज की याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को 3 जुलाई तक हलफनामा दाखिल करना होगा।
पुणे में 31 दिसंबर, 2017 को आयोजित एलगर परिषद के बाद भीमा-कोरेगांव में फैली जातीय हिंसा के दौरान इस आयोजन के पीछे माओवादियों का हाथ होने की जांच शुरू की गई थी। इस सिलसिले में 28 अगस्त, 2018 को सुधा को गिरफ्तार किया गया था और वह तभी से जेल में हैं।
सुधा और कई अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधिया निरोधक अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। भारद्वाज ने इस आधार पर जमानत की मांग की है कि ट्रायल जज 2019 में उनके खिलाफ दाखिल आरोप पत्र पर संज्ञान नहीं ले सकता, क्योंकि वह उस समय तक एनआईए अधिनियम के तहत यूएपीए से जुड़े मामले सुनने के लिए विशेष जज नहीं बनाए गए थे।
बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे जामदार की खंडपीठ ने मंगलवार को सुधा की याचिका पर एनआईए के वकील संदेश पाटिल को जवाब दाखिल करने को कहा। अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी।