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कंगना की 'क्वीन फुल पावर' को राहत: बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार, कहा- क्वीन से नहीं मिलती कहानी

Fri, 16 Oct 2026 10:30 PM IST
सुनील मेहरोत्रा अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंगना रनौत अभिनीत फिल्म 'क्वीन फुल पावर' पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि पहली नजर में इस फिल्म की 2014 में आई फिल्म 'क्वीन' से कोई समानता या मेल नहीं है। दोनों फिल्मों में कंगना रनौत ही मुख्य अभिनेत्री हैं।
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कंगना - फोटो : एक्स
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत की आने वाली नई फिल्म 'क्वीन फुल पावर' की रिलीज पर तुरंत रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत का कहना है कि पहली नजर में देखने पर यह फिल्म 2014 में आई सुपरहिट फिल्म 'क्वीन' से कोई मेल नहीं खाती है। अदालत ने बुधवार को इस मामले पर अपना फैसला सुनाया था, जिसकी लिखित कॉपी शुक्रवार को सार्वजनिक हुई । मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस संदीप मार्ने ने अपने आदेश में कहा कि अगर दोनों फिल्मों की कहानियों और उनकी रूपरेखा की आपस में तुलना की जाए, तो दोनों में कोई समानता या एक जैसापन नजर नहीं आता। अदालत ने माना कि ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि 'क्वीन फुल पावर' पुरानी फिल्म के आधार पर बनाई गई कोई दूसरी फिल्म है।

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अदालत ने कहा कि दोनों फिल्मों की कहानियों, उनके विषय और पूरी पटकथा में कुछ भी एक जैसा नहीं है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यह नई फिल्म पुरानी फिल्म 'क्वीन' का न तो अगला हिस्सा है, न ही उससे पहले की कोई कहानी है, न ही उसका कोई अलग से बनाया गया हिस्सा या नया रूप है। इस मामले में फैंटम स्टूडियो ने जुलाई में फिल्म के निर्माताओं के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। उनका कहना था कि जब 2014 में फिल्म 'क्वीन' बनी थी, तब एक समझौता हुआ था जिसके मुताबिक भविष्य में इस फिल्म से जुड़ा कोई भी अगला हिस्सा बनाने पर दोनों पक्षों का आधा-आधा अधिकार रहेगा।

प्रोडक्शन हाउस ने अदालत में दावा किया था कि उसने इस नई फिल्म को बनाने या पुरानी कहानी को आगे बढ़ाने के लिए अपनी कोई मंजूरी नहीं दी है। इसी आधार पर उन्होंने 250 करोड़ रुपये के नुकसान के मुआवजे की मांग की थी और फिल्म की रिलीज पर तुरंत रोक लगाने की अपील की थी। हालांकि, फिल्म के निर्माताओं ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 'क्वीन फुल पावर' एक पूरी तरह से नई, अलग और आजाद कहानी वाली फिल्म है। अदालत ने भी समानता के दावों को नकारते हुए कहा कि 2014 में आई फिल्म एक प्यार और पारिवारिक ड्रामा वाली फिल्म थी, जबकि यह नई फिल्म मुख्य रूप से किडनैपिंग पर आधारित एक मजेदार और सस्पेंस वाली फिल्म है।
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अदालत ने बताया कि इस नई फिल्म की कहानी मुंबई में रहने वाली एक आम मध्यमवर्गीय परिवार की अधेड़ उम्र की मराठी महिला के आसपास घूमती है, जिसकी जिंदगी में किडनैपिंग के बाद अचानक बड़ी हलचल मच जाती है। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि इस नई फिल्म में मुख्य किरदार के मुंबई से बाहर जाने या किसी लंबी यात्रा पर जाने का कोई जिक्र नहीं है, जिससे वह अपनी आजादी, आत्मविश्वास या मजबूती की तलाश करती दिखे, जबकि पुरानी फिल्म का मुख्य संदेश यही था।

इसके अलावा अदालत ने फैंटम स्टूडियो के इस तर्क को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया कि फिल्म के नाम में 'क्वीन' शब्द का इस्तेमाल होने से दर्शकों के बीच गलतफहमी या भ्रम पैदा होगा। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 'क्वीन' शब्द का इस्तेमाल तो पहले भी कई फिल्मों के नाम में होता रहा है। यह एक तारीफ भरा और सामान्य शब्द है, जिसे पुरानी फिल्म की कामयाबी की वजह से केवल उसी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। इस तरह हाईकोर्ट ने फैंटम स्टूडियो की अंतरिम याचिका को खारिज कर दिया और केस के चलते रहने के दौरान निर्माताओं को फिल्म बनाने, रिलीज करने या उसका प्रचार करने से रोकने से मना कर दिया।

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