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बॉम्बे हाईकोर्ट : बेटी को पिता की दूसरी शादी पर सवाल उठाने का हक

Sat, 20 Mar 2021 03:41 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई।
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बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि किसी भी बेटी को अपने पिता की दूसरी शादी की वैधता को लेकर सवाल उठाने का पूरा हक है।

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हाईकोर्ट ने 66 वर्षीय बेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। साथ ही, फैमिली कोर्ट के उस फैसले को भी गलत ठहराया, जिसमें बेटी को अपने पिता की शादी की वैधता को चुनौती देने का अधिकार नहीं होने की बात कही गई थी।

जस्टिस आरडी धनुका और जस्टिस जीवी बिष्ट की पीठ ने यह फैसला बुधवार को सुनाया, जिसका विस्तृत ब्योरा शुक्रवार को जारी किया गया। पीठ ने 66 वर्षीय महिला को फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल करने की अनुमति दी।
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फैमिली कोर्ट ने कहा था कि विवाह की वैधता पर सवाल उठाने का हक केवल उसमें शामिल दोनों पक्षकार यानी पति-पत्नी को ही है। याचिका में बेटी ने कहा था कि उसकी मां की मृत्यु के बाद 24 जुलाई, 2003 को उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी। अपने पिता के 2016 में निधन के बाद उसे अपनी सौतेली मां के पहले से शादीशुदा होने और अब तक पहले पति से तलाक नहीं लेने की जानकारी मिली थी।

बेटी का आरोप है कि उसकी सौतेली मां उसके पिता की मानसिक बीमारी के बारे में जानती थी। इसका गलत फायदा उठाते हुए सौतेली मां ने उसके पिता की संपत्ति अपने नाम करा ली। यही नहीं, पिता की अचल संपत्ति पर कानूनन उसका अधिकार होने के बावजूद उसे भी सौतेली मां ने कब्जा लिया।

इस कारण उसे अपना कानूनी हक नहीं मिला। बेटी का कहना है कि उसने 2016 में फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपने पिता की दूसरी शादी को खारिज करने की मांग की। लेकिन फैमिली कोर्ट ने उसे अपने पिता की शादी को चुनौती देने का अधिकार नहीं होने की बात कही और उसकी सौतेली मां के पक्ष में फैसला सुनाया।

सौतेली मां का दावा, पंजीकृत है उसकी शादी
सौतेली मां ने फैमिली कोर्ट में याचिका की वैधता पर ही सवाल उठाया था। सौतेली मां का कहना है कि बेटी के पास शादी की वैधता को चुनौती देने का कोई सबूत नहीं है। उसने 23 अगस्त, 1984 को अपने पति को उर्दू में तलाक दे दिया था। मुंबई के मैरिज रजिस्ट्रार ने सारे दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही याचिकाकर्ता के पिता के साथ उसकी शादी को पंजीकृत किया था।

फैसले में यह बोला हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने 43 पन्ने के अपने आदेश में कहा कि बेटी को सौतेली मां के तलाक की सच्चाई अपने पिता की मौत के बाद पता चली। इसके बाद उसने जल्द से जल्द फैमिली कोर्ट में इस विसंगति के खिलाफ याचिका दाखिल की। अपने पिता की मौत हो जाने के कारण उसे इस विसंगति को आगे बढ़ाने और इस शादी की वैधता पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है।
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पीठ ने कहा, फैमिली कोर्ट ने बेटी को पिता की शादी पर सवाल उठाने से रोककर गलत फैसला किया। साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इस पर फैसला लेने का अधिकार फैमिली कोर्ट को ही है, जिसने गलत तरीके से याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया। इसलिए वह नए सिरे से छह महीने के अंदर फैसला सुनाने के लिए इस मामले को वापस फैमिली कोर्ट ही भेज रही है।

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