बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूछा है कि महाराष्ट्र की मौजूदा और पिछली सरकार को अग्नि सुरक्षा नियम लागू करने के लिए समिति बनाने का वक्त क्यों नहीं मिला? जबकि इसी दौरान करीब 400 सरकारी प्रस्ताव जारी हुए हैं। हाईकोर्ट ने 11 अप्रैल को सरकार को इस बारे में निर्देश दिए थे। सरकारी वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि नए नियमों के लिए सरकार 2009 में ड्राफ्ट सुरक्षा नियमों को शामिल कर रही है। इसके लिए विशेष समिति बनानी है, जिसमें तीन-चार महीने लग जाते हैं।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एमएस कार्णिक ने कहा कि यह बहुत लंबी अवधि है। अखबारों में तो आ रहा है कि सरकार ने हाल में 400 जीआर जारी किए हैं। एक साधारण समिति बनाने के लिए सरकार को इतना समय चाहिए, लेकिन जीआर जारी करने के लिए उसके पास समय है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि अप्रैल में दिए आदेश के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए, इस बारे में वह अगली तारीख तक बताए।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट एक वकील की जनहित याचिका पर यह सुनवाई कर रही है, जिसमें इमारतों में अग्नि सुरक्षा नियम लागू करने का निवेदन किया गया है। यह नियम 2009 में मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद बने थे।
सीबीआई निदेशक की नियुक्ति पर सुनवाई से हटे न्यायाधीश
बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने सुबोध जायसवाल की सीबीआई निदेशक के तौर पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने यह फैसला याचिकाकर्ता और महाराष्ट्र के पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त राजेंद्र त्रिवेदी के उनके खिलाफ एक शिकायत पत्र के चलते लिया। त्रिवेदी ने जायसवाल की नियुक्ति को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की है।
नीट विवाद : मुआवजा और दोबारा परीक्षा कराने की मांग
केरल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर उन छात्राओं के लिए मुआवजे की मांग की गई है, जिन्हें कोल्लम जिले में नीट परीक्षा देने से पहले अन्तःवस्त्र उतारने के लिए बाध्य किया गया था। तिरुवनंतपुरम निवासी याचिकाकर्ता आसिफ आजाद ने कोर्ट से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को नतीजे जारी करने से पहले दो हफ्ते में दोबारा परीक्षा आयोजित कराने का निर्देश देकर छात्राओं के पक्ष में फैसले की गुहार लगाई है। याचिका में केंद्र सरकार को देशभर में परीक्षाओं के लिए एक समान प्रोटोकॉल स्थापित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। अब कोर्ट इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा।