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Bombay HC: आरे कॉलोनी में पेड़ काटने के खिलाफ IAS अधिकारी को मैसेज भेजने का मामला, कोर्ट ने केस किया खारिज

Fri, 07 Apr 2023 03:16 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, मुंबई।

सार

जस्टिस सुनील शुकरे और जस्टिस मिलिंद सथाये की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के अपराध के लिए एफआईआर दर्ज करना इस देश के नागरिकों के अधिकारों पर हमला होगा।
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बॉम्बे हाईकोर्ट। - फोटो : ANI
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विस्तार
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मुंबई की आरे कॉलोनी में मेट्रो रेल कार शेड के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले एक आईएएस अधिकारी को भेजे गए मैसेज के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि आईएएस अधिकारी को भेजे गए मैसेज आपत्तिजनक नहीं थे, बल्कि इस देश के एक नागरिक के रूप में एक लोकतांत्रिक अधिकार का दावा था कि वह आपत्ति और विरोध करने के लिए अपने विचार रखे।

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जस्टिस सुनील शुकरे और जस्टिस मिलिंद सथाये की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के अपराध के लिए एफआईआर दर्ज करना इस देश के नागरिकों के अधिकारों पर हमला होगा। पीठ ने पांच अप्रैल को उपनगरीय बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) पुलिस स्टेशन में बेंगलुरु निवासी अविजीत माइकल के खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी को खारिज कर दिया। एफआईआर में कथित तौर पर महिला आईएएस अधिकारी अश्विनी भिडे को आपत्तिजनक संदेश भेजने और सार्वजनिक कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोकने के आरोप थे। भिडे उस समय मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) का नेतृत्व कर रही थीं।  

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ऐसा लगता है कि इन संदेशों को भेजने वाले की मंशा जंगल की रक्षा करना है। ये जंगल मुंबई के लिए फेफड़े की तरह काम कर रहे हैं।अदालत ने कहा कि इन संदेशों में कोई आपत्तिजनक सामग्री या कोई अश्लीलता नहीं है। बल्कि, ऐसा लगता है कि उन्हें इस देश के नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार के दावे के तौर पर अपना दृष्टिकोण रखने, आपत्ति करने, विरोध करने, राजी करने, आग्रह करने आदि के लिए भेजा गया है।
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अदालत ने कहा कि अगर इस तरह किसी पर आपराधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, जैसे कि याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज किया गया है, तो यह इस देश के नागरिकों के अधिकारों पर आक्रमण के समान हो सकता है। पुलिस को इस तरह की शिकायत मिलने पर चाहे वह किसी भी उच्च पद पर क्यों न हो देश के किसी भी सामान्य नागरिक के खिलाफ कभी भी आपराधिक कानून के तहत मामला दर्ज नहीं करना चाहिए।

अदालत ने कहा, और अगर ऐसा होता है, तो यह उस चीज के खिलाफ उसकी आवाज को दबाने जैसा होगा, जिसे वह गलत चीज मानता है। पीठ ने प्राथमिकी रद्द करते हुए संबंधित पुलिस अधिकारी को चेतावनी जारी की। अदालत ने कहा, याचिकाकर्ता के खिलाफ अपराध दर्ज करने वाले जांच अधिकारी को भविष्य में ऐसे मामलों में अपराध दर्ज करने में सावधानी बरतने की चेतावनी दी जाती है।

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