बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता नवाब मलिक को चिकित्सा के आधार पर जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि उन्हें 'विशेष चिकित्सा सहायता' मिल रही है और उनके स्वास्थ्य अधिकार या जीवन अधिकार का किसी भी तरह से उल्लंघन नहीं किया रहा है। हाईकोर्ट ने आगे कहा कि मलिक की मेडिकल रिपोर्ट से यह संकेत नहीं मिलता है कि वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। इसके विपरीत रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व राज्य मंत्री को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है।
कोर्ट ने खारिज की याचिका
न्यायिक हिरासत में है एनसीपी नेता
बता दें कि ईडी ने नवाब मलिक को फरवरी 2022 में भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके सहयोगियों की कथित गतिविधियों से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं और एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। मलिक के वकील अमित देसाई ने तर्क दिया था कि उनके मुवक्किल का स्वास्थ्य पिछले आठ महीनों से बिगड़ रहा था और वह क्रोनिक किडनी बीमारी से जूझ रहे हैं।
क्रिटी केयर एशिया अस्पताल में भर्ती हैं मलिक
जांच के मेडिकल बोर्ड का गठन
इतना ही नहीं हाई कोर्ट के निर्देश पर आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति की जांच करने के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया था और इसकी रिपोर्ट से पता चलता है कि उसकी बाईं किडनी छोटी है और दाहिनी किडनी अकेले ही काम कर रही है। अदालत ने कहा कि जैसे का आवेदक ने दावा किया है उनकी दाहिनी किडनी खराब हो गई है या यह केवल 60 प्रतिशत ही काम कर रही है, रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं है। हाईकोर्ट के मुताबिक रिपोर्ट यह संकेत भी नहीं देती है कि आवेदक किसी ऐसी बीमारी से पीड़ित है, जिसके आधार पर चिकित्सा के आधार पर जमानत देने को उचित ठहराया जा सके।