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Bombay High Court: 2022 के हिट-एंड-रन मामले को लेकर अदालत सख्त, ढुलमुल जांच के लिए मुंबई पुलिस को लगाई फटकार

Thu, 04 Sep 2025 05:14 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

2022 के हिट-एंड-रन मामले की जांच में ढुलमुल रवैया अपनाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने जांच अधिकारी के रवैये को निंदनीय बताते हुए पुलिस महानिदेशक को उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। साथ ही निचली अदालत को मामले की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। 
 
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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीन साल पहले हुए हिट-एंड-रन मामले की जांच में ढुलमुल रवैया अपनाने पर मुंबई पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि पुलिस जांच अपेक्षित मानकों पर खरी नहीं उतरी और केवल अदालत के दखल के बाद ही मामले में कुछ तेजी आई।

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न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम की खंडपीठ ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि जांच अधिकारी का रवैया 'चौंकाने वाला और निंदनीय' है, इसलिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। अदालत ने मामले की सुनवाई में तेजी लाने और एक साल के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया।

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पुलिस पर जांच में गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप
यह आदेश 20 वर्षीय पीड़ित की मां की याचिका पर दिया गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस ने जांच में कोई गंभीरता नहीं दिखाई और न ही अब तक ट्रक और उसके चालक का पता लगाया गया। याचिका के मुताबिक, अगस्त 2022 में मलाड इलाके में एक तेज रफ्तार ट्रक ने पीड़ित के स्कूटर को टक्कर मार दी थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी।

पीड़ित की मां की याचिका पर नए सिरे से शुरू हुई जांच
अक्तूबर 2023 में, पुलिस ने स्थानीय अदालत में 'ए' समरी रिपोर्ट (आरोपी की पहचान न हो पाने की स्थिति) दायर की। लेकिन पीड़ित की मां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद पुलिस ने मामले को फिर से खोला और नए सिरे से जांच शुरू की। पिछले महीने, हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले में आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया गया है। 

मामले में पुलिस की लापरवाही बेहद गंभीर 
अदालत ने अपने तीन सितंबर के आदेश में कहा, '17 अगस्त 2022 को एक युवक की जान चली गई, लेकिन आरोपी का पता लगाने और आरोपपत्र दाखिल करने में पुलिस को तीन साल लग गए। पुलिस की यह लापरवाही बेहद गंभीर है।' अदालत ने कहा कि यह समझ से परे है कि पिछले तीन वर्षों में पुलिस ने ऐसे कदम क्यों नहीं उठाए, जो हाल ही में उठाए गए। साफ है कि अदालत की चेतावनी के बाद ही जांच में तेजी आई।
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जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करें पुलिस महानिदेशक
हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी के रवैये को निंदनीय बताते हुए पुलिस महानिदेशक को उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही निचली अदालत को एक साल के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश भी दिया गया।

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