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Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शराबी शख्स की मुआवजा याचिका की खारिज, की ये बड़ी टिप्पणी

Fri, 13 Feb 2026 12:47 AM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने रेलवे प्लेटफॉर्म पर घायल हुए एक व्यक्ति को मुआवजा देने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि घटना उसके नशे की हालत का परिणाम थी। अदालत ने माना कि अत्यधिक शराब के सेवन के बाद प्लेटफॉर्म के किनारे खड़ा होना लापरवाही है और ऐसे मामलों में कानून मुआवजे की अनुमति नहीं देता।
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बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने रेलवे हादसे में घायल एक व्यक्ति की मुआवजा याचिका खारिज करते हुए अमेरिकी लेखक एफ. स्कॉट फिट्जगेराल्ड के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख किया। अदालत ने कहा, 'पहले आप शराब लेते हैं, फिर शराब आपको पीने लगती है और अंत में शराब आपको पूरी तरह अपने कब्जे में कर लेती है।'
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न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन की एकल पीठ ने बुधवार को पारित आदेश में कहा कि शराब हर चीज को बर्बाद कर देती है। यह टिप्पणी उस अपील को खारिज करते हुए की गई, जिसमें एक शहर निवासी ने रेलवे दावा न्यायाधिकरण के 2014 के आदेश को चुनौती दी थी। न्यायाधिकरण ने उसे रेलवे प्लेटफॉर्म पर लगी चोटों के लिए मुआवजा देने से इनकार कर दिया था।

चोट नशे की हालत में किए गए कृत्य का नतीजा :हाईकोर्ट
अदालत ने कहा कि आवेदक को राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि चोट नशे की हालत में किए गए उसके कृत्य का नतीजा थी। आदेश में कहा गया कि अत्यधिक शराब के सेवन से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, रिश्तों, करियर और सामाजिक जीवन पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हैं।
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याचिकाकर्ता, जो बॉम्बे हॉस्पिटल में लैब असिस्टेंट था, ने दावा किया था कि 10 मार्च 2001 की आधी रात को वह मरीन लाइंस स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था, तभी एक आती हुई ट्रेन की चपेट में आ गया। उसे पहले जीटी अस्पताल और बाद में बॉम्बे हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां रिकॉर्ड में उल्लेख था कि उसने काफी मात्रा में शराब का सेवन किया था।

यह अचानक घटी घटना नहीं :हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि इस घटना को 'अकस्मात' नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति अत्यधिक नशे में प्लेटफॉर्म के किनारे खड़ा होता है, तो यह रेलवे अधिनियम की धारा 124ए के तहत आता है, जो नशे की स्थिति में हुए हादसों में मुआवजे पर रोक लगाती है।
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