बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति के फर्जी मुठभेड़ मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती न दिए जाने पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी से पूछा कि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को बरी किए जाने के फैसले को उसने चुनौती क्यों नहीं दी?
बॉम्बे हाईकोर्ट, सोहराबुद्दीन शेख के भाई रुबाबुद्दीन शेख द्वारा दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रहा है। शेख ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को बरी किए जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती है।
ये भी पढ़ें- सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस: CBI कोर्ट से बरी होकर बोले DG वंजारा-मुझे इंसाफ मिला
इस दौरान न्यायाधीश रेवती मोहिते ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश से सीबीआई को भी उतना ही प्रभावित होना चाहिए था। उन्होंने पूछा कि क्या जांच एजेंसी आईपीएस अधिकारियों राजकुमार पांडियन, डीजी वंजारा और दिनेश एमएन को बरी किए जाने के अगस्त, 2016 और अगस्त, 2017 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
ये भी पढ़ें- कुछ इस तरह लिखी गई थी सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की पटकथा
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश मोहिते ने निर्देश दिया कि सीबीआई काउंसिल को अगली सुनवाई की तारीख 12 अक्तूबर से पहले किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने से बचना चाहिए। रुबाबुद्दीन ने अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करके इस मामले में तीनों अधिकारियों को बरी किए जाने को चुनौती दी है।