बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि मुखबिर काफी खतरा उठाते हैं, ऐसे में सरकार का दृष्टिकोण ऐसा होना चाहिए कि वह सूचना देने के लिए हतोत्साहित ना हो। एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह महिला को इनाम की रकम जारी करे। बता दें कि महिला के पति चंद्रकांत धर्वे ने साल 1991 में कस्टम विभाग को हीरे की तस्करी के बारे में सूचना दी थी, जिस पर कस्टम विभाग ने छापेमारी कर करीब 90 लाख रुपए के हीरे बरामद किए थे।
इस सूचना के बदले विभाग ने चंद्रकांत धर्वे को इनाम के एडवांस के तौर पर 3 लाख रुपए दिए। हालांकि इनाम की बाकी रकम विभाग ने चंद्रकांत को नहीं दी। कई बार विभाग के दफ्तर के चक्कर काटने के बाद भी चंद्रकांत को उनके इनाम की रकम नहीं मिली। साल 2010 में चंद्रकांत का निधन हो गया। चंद्रकांत के निधन के बाद उनकी पत्नी जयश्री धर्वे ने इनाम की बाकी रकम पाने के लिए विभाग के चक्कर लगाए। जब विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की तो जयश्री धर्वे ने 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान विभाग ने कोर्ट में कहा कि उन्हें पहले इस बात की पुष्टि करनी है कि क्या चंद्रकांत ही असली मुखबिर थे या नहीं लेकिन कोर्ट ने विभाग की इस दलील को खारिज कर दिया क्योंकि विभाग पहले ही इनाम का एडवांस चंद्रकांत धर्वे को दे चुका था। जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस अभय आहूजा की डिविजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हालांकि नियमों के तहत इनाम की मांग करना कानूनी अधिकार नहीं है लेकिन इसे मनमाने तरीके से खारिज भी नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा दृष्टिकोण नहीं अपनाया जाना चाहिए कि कोई व्यक्ति सूचना देने के लिए आगे ही ना आए। आखिरकार इससे सरकारी खजाने को ही मदद मिलती है। कोर्ट ने कहा कि एक मुखबिर सूचना देने के लिए काफी खतरा उठाता है। दुर्भाग्य से इस मामले में सरकार ने सख्त रुख अपनाया और संवेदनशीलता से यह मामला निपटाया जाना चाहिए था। हाईकोर्ट बेंच ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह जयश्री धर्वे के दावे पर इनाम की रकम जारी करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह रकम 12 हफ्तों के अंदर मिलनी चाहिए।