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'पूरा मुंबई गंदगी से भरा है': कचरे की समस्या पर हाईकोर्ट सख्त, बीएमसी को फटकार; किसे दी कार्रवाई की चेतावनी?

Thu, 10 Sep 2026 07:24 PM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, मुंबई

सार

मुंबई में सड़कों पर जमा कचरे को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के आसपास प्रदूषण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शहर में कई जगह लगातार कचरे के ढेर बने हुए हैं। पीठ ने वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही और स्थिति नहीं सुधरने पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए। 
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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मुंबई की सड़कों पर जगह-जगह कचरा जमा होने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को नगर निकाय को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि 'पूरा शहर गंदगी से भरा है' और स्थिति में सुधार नहीं होने पर वार्ड के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। 
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कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के आसपास प्रदूषण से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को आड़े हाथ लिया। पीठ ने कहा कि 'पूरा नगर निकाय तंत्र निष्क्रिय है।'

हाईकोर्ट ने पीएम मोदी के किस सुझाव का किया जिक्र?
अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कुछ समय पहले दिए गए सुझाव का जिक्र करते हुए सफाई का संदेश फैलाने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मदद लेने की सलाह भी दी। पीठ ने कहा, 'हर जगह सिर्फ गंदगी है। हम बीएमसी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। लगता है कि तंत्र काम नहीं कर रहा है। आपको एक उचित एसओपी की जरूरत है। हम खुद को अंतरराष्ट्रीय शहर कैसे कह सकते हैं?'
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हाईकोर्ट ने कहा कि नगर आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति में ज्यादा सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। पीठ ने कहा कि वार्ड अधिकारी भी कथित तौर पर काम नहीं कर रहे हैं। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को सार्वजनिक सड़कों पर कचरा फेंकने या गंदगी करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने पर विचार करने का सुझाव दिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को दी क्या चेतावनी?
पीठ ने कहा, 'यह गंभीर मामला है। यह बहुत पीड़ादायक है। शहर में कुछ ऐसे स्थान चिह्नित हैं, जहां हमेशा कचरे के ढेर दिखाई देते हैं और फिर भी संबंधित वार्ड अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते।' अदालत ने कहा, 'अब हम इन अधिकारियों को भी जवाबदेह और जिम्मेदार ठहराएंगे। उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। पूरा शहर गंदगी से भरा है। बहुत हो गया। बीएमसी हमें झूठे आश्वासन दे रही है।'

पीठ ने कहा कि उसके पास अब बीएमसी आयुक्त को व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदारी तय करने का निर्देश देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अदालत ने कहा, 'ऐसा लगता है कि पूरा नगर निकाय तंत्र निष्क्रिय है। किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। अब हम कड़ा आदेश पारित करेंगे। एक सीमा होती है।'

कचरे को लेकर सख्त कदम उठाने के निर्देश
अदालत ने बीएमसी को अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पेश करने का आदेश दिया। साथ ही 26 वार्डों में सार्वजनिक सड़कों की सफाई और स्वच्छता की जिम्मेदारी संभालने वाले सभी अधिकारियों की सूची देने को कहा। हाईकोर्ट ने कहा, 'जैसे ही हमें सड़क पर कोई कचरा या गंदगी मिलेगी, हम संबंधित अधिकारी को हटा देंगे। वे सार्वजनिक सेवा में रहने के लायक नहीं हैं।'

अदालत ने नगर निकाय से कचरा अलग-अलग करने की व्यवस्था को लेकर भी सख्त कदम उठाने को कहा। पीठ ने कहा कि वह बीएमसी को एक आदर्श नगर निगम के रूप में देखना चाहती है, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्तूबर को होगी।
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