पॉक्सो मामलों में विवादास्पद फैसले देने की वजह से चर्चा में आईं बंबई उच्च न्यायालय की अतिरिक्त जज जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला को अतिरिक्त जज के दौरान दो साल की जगह एक साल का नया कार्यकाल मिल गया है। सरकार ने उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा की गई संशोधित सिफारिश को स्वीकार करते हुए जस्टिस गनेडीवाल के कार्यकाल को बढ़ा दिया है। उनका नया कार्यकाल 13 फरवरी से अमल में माना जाएगा। अतिरिक्त जज के तौर पर जस्टिस गनेडीवाल के कार्यकाल को ऐसे समय पर बढ़ाया गया है जब उनका दो साल का कार्यकाल शुक्रवार को खत्म होने वाला था।
नियुक्ति वारंट में कहा गया है, 'भारत के संविधान के अनुच्छेद 224 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति का इस्तेमाल करते हुए, राष्ट्रपति ने श्रीमती पुष्पा वीरेंद्र गनेडीवाला को नियुक्त करते हैं। उन्हें 13 फरवरी 2021 से एक वर्ष की अवधि के लिए बंबई उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया जाता है।' यदि उन्हें सेवा विस्तार नहीं दिया जाता तो उन्हें फरवरी में जिला न्यायपालिका में वापस जाना होता। बंबई उच्च न्यायालय आने से पहले 2019 तक वे यहीं थीं। जस्टिस गनेडीवाल द्वारा हाल में पॉक्सो के दो मामलों को लेकर दिए गए फैसलों की वजह से उनकी काफी आलोचना हुई थी।
अतिरिक्त जज के तौर पर मिला एक साल का नया कार्यकाल
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अतिरिक्त जज जस्टिस गनेडीवाला की बंबई उच्च न्यायालय में स्थायी न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के प्रस्ताव की मंजूरी को वापस ले लिया था। यह फैसला उनके दो विवादास्पद फैसलों के चलते लिया गया।
कॉलेजियम ने अपनी सिफारिश में कहा कि उन्हें दो साल के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर नया कार्यकाल दिया जाए लेकिन सरकार ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर कहा कि उन्हें दो साल की जगह एक साल के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश का कार्यकाल दिया जाता है।
दो साल के कार्यकाल की सिफारिश पर कॉलेजियम से पुनर्विचार करने के लिए भेजने की जगह सरकार ने केवल एक साल का ही कार्यकाल देने का निर्णय लिया। सामान्यत: स्थायी न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नति से पहले अतिरिक्त जजों को दो साल के लिए नियुक्त किया जाता है।