बॉम्बे हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज एसएस शिंदे ने बड़प्पन दिखाते हुए एक वकील को डांटने के बजाय शांत किया। उन्होंने कहा कि हम एक परिवार की तरह हैं। वकील ने पहले की कार्यवाही में जज की ओर से कथित 'अपमान' किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की थी। न्यायाधीश शिंदे ने कहा कि अगर पाटिल उनके शब्दों से आहत हुईं है तो उन्हें खेद है। जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे जामदार की खंडपीठ मंगलवार को राज्य के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ सीबीआई की प्राथमिकी के विरुद्ध महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसी मामले में वकील जयश्री पाटिल ने जस्टिस शिंदे के खिलाफ आरोप लगाना शुरू किया।
वकील पाटिल ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने उनकी याचिका पर 5 अप्रैल, 2021 को देशमुख के खिलाफ प्रारंभिक जांच का आदेश दिया था। इसलिए उन्हें वर्तमान याचिका में एक पक्ष के रूप में जोड़ा जाना चाहिए और अदालत को इस पर देशमुख की याचिका के साथ सुनवाई करनी चाहिए। पाटिल ने अपनी दलील में कहा कि उन्होंने दोनों मामलों को टैग करने के लिए पहले ही प्रधान न्यायाधीश की अदालत में एक अर्जी डाली थी।
पाटिल ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से भी की शिकायत
पाटिल ने आगे कहा कि उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना से भी इस मामले की शिकायत की। पाटिल ने अदालत में अपनी दलील पेश करते हुए कहा कि जब याचिका मार्च में सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति शिंदे की पीठ के समक्ष आई थी। एक दिन पहले मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की थी।
अनिल देशमुख की सुनवाई पर जस्टिस शिंदे ने लगाई थी फटकार
जस्टिस शिंदे ने कहा कि, एक बार जब हमारी पीठ ने उनके द्वारा दायर याचिका पर विचार किया, तो मैंने उनसे याचिका के आधारों के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि वकील और न्यायाधीश एक ही परिवार हैं। कभी-कभी मेरे शब्द कड़वे हो सकते हैं। अगर मेरे शब्दों ने आप आहत हुईं तो मुझे खेद है। इसके अलावा मुझे नहीं लगता कि कोई मुद्दा हो सकता है। राज्य के वरिष्ठ अधिवक्ता डेरियस खंबाटा ने कहा कि यह अदालत की उदारता है कि वह खेद व्यक्त कर रही है। हालांकि, जिस तरह से पाटिल ने आरोप लगाए वह उचित नहीं है।