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Dixit Solanki DNA Test: ओमान में जान गंवाने वाले भारतीय की डीएनए जांच चाहते हैं परिजन, आज हाईकोर्ट में सुनवाई

Tue, 07 Apr 2026 08:41 AM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

ओमान तट पर हमले में मारे गए भारतीय नाविक दिक्षित सोलंकी के परिवार ने शव की पहचान पर संदेह जताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट में डीएनए टेस्ट की मांग की है। अदालत ने डीजी शिपिंग से स्पष्ट रुख मांगा है और आज  इस मामले में अहम सुनवाई हो सकती है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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ओमान तट के पास हुए हमले में मारे गए भारतीय नाविक दीक्षित सोलंकी के शव की पहचान को लेकर विवाद गहरा गया है। मृतक के परिवार ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए डीएनए परीक्षण कराने की मांग की है। परिवार का आरोप है कि संबंधित कंपनी और सरकारी एजेंसियों की ओर से विरोधाभासी जानकारी दी जा रही है, जिससे मामले में स्पष्टता नहीं है।

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6 अप्रैल को सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के तहत आने वाले डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग से इस मामले में स्पष्ट रुख बताने को कहा। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंकद की पीठ ने यह निर्देश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को तय की है, जब डीएनए परीक्षण को लेकर आदेश दिए जा सकते हैं।

केवल जले हुए अवशेष मिलने का दावा

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जिस जहाज एमकेडी व्योम पर सोलंकी कार्यरत थे, वहां से केवल जली हुई हड्डियां ही बरामद हो सकीं। ऐसे में शव की पहचान सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

परिवार ने क्या लगाया आरोप?

परिवार ने याचिका में कहा है कि उन्हें लगातार विरोधाभासी जानकारी दी जा रही है। परिवार के वकील ने अदालत को बताया कि 6 अप्रैल को डीजी शिपिंग के मुंबई कार्यालय से सोलंकी के पिता को भेजे गए ईमेल में खुद डीएनए टेस्ट की आवश्यकता स्वीकार की गई थी। हालांकि, अदालत में जब आधिकारिक रुख पूछा गया तो विभाग की ओर से जवाब देने के लिए समय मांगा गया।

पोस्टमॉर्टम और पहचान पर भी सवाल

परिवार का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि पोस्टमॉर्टम हुआ या नहीं, या शव की पहचान किस आधार पर की गई। ऐसे में अंतिम संस्कार से पहले डीएनए परीक्षण जरूरी है ताकि मृतक की पहचान की पुष्टि हो सके।

परिवार ने यह भी बताया कि दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने डीएनए सैंपल लेने और संरक्षित करने में असमर्थता जताई थी। दूतावास ने सलाह दी थी कि शव भारत लाने के बाद यहां परीक्षण कराया जाए। इसके बाद परिवार ने मुंबई के कांदिवली पुलिस स्टेशन से मदद मांगी, लेकिन वहां भी उन्हें सहयोग नहीं मिला। अंततः उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

रविवार को मुंबई पहुंचा शव

25 वर्षीय दिक्षित सोलंकी का पार्थिव शरीर रविवार को मुंबई लाया गया, जहां एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल पर उनके पिता और बहन ने उसे प्राप्त किया। दिक्षित सोलंकी की मौत 4 मार्च को उस समय हुई थी, जब ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर विस्फोटकों से लदी ड्रोन बोट ने हमला कर दिया। यह घटना पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच हुई थी।

परिवार की क्या है मांग?

सोलंकी परिवार ने मांग की है कि मामले से जुड़े सभी जांच और फॉरेंसिक रिकॉर्ड उन्हें उपलब्ध कराए जाएं और डीएनए परीक्षण सरकारी एजेंसी से कराया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

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