दीवानी कोर्ट ने कहा था कि ट्रेडमार्क और बौद्धिक संपदा से संबंधित मामला होने के कारण सुनवाई करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। याचिका के अनुसार, फरवरी 1928 में स्थापति याचिकाकर्ता क्लब ने अपने एक पदाधिकारी कंवर सिंह को बेहतर सोशल मीडिया पहुंच के लिए इंटरनेट आधारित चैट समूह बनाने के लिए कहा था।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि फेसबुक पर एक समूह के स्वामित्व की वसूली और बहाली को ट्रेडमार्क और बौद्धिक संपदा से संबंधित विवाद नहीं कहा जा सकता है। दीवानी कोर्ट के पास इस तरह की घोषणा की मांग करने वाले मुकदमे की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र है। जस्टिस नितिन सांबरे की एकल पीठ ने 24 मार्च को आदेश पारित किया था।
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इसकी एक प्रति सोमवार को मुहैया कराई गई। ‘द हिमालयन क्लब’की ओर से दीवानी कोर्ट से पारित एक अगस्त 2022 के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई थी, जिसमें उसके मुकदमे की सुनवाई से इन्कार कर दिया गया था। दीवानी कोर्ट ने कहा था कि ट्रेडमार्क और बौद्धिक संपदा से संबंधित मामला होने के कारण सुनवाई करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। याचिका के अनुसार, फरवरी 1928 में स्थापति याचिकाकर्ता क्लब ने अपने एक पदाधिकारी कंवर सिंह को बेहतर सोशल मीडिया पहुंच के लिए इंटरनेट आधारित चैट समूह बनाने के लिए कहा था।
जस्टिस सांबरे ने कहा कि फेसबुक समूह ने किसी भी तरह से वादी क्लब के पंजीकृत ट्रेडमार्क होने का दावा नहीं किया है, जिसका सिंह ने कथित रूप से उल्लंघन किया था। कोर्ट ने कहा कि बल्कि वादी ने एक घोषणा किए जाने की मांग की है कि वह फेसबुक समूह का मालिक है और उसी के आधार पर राहत का दावा किया।