खंडपीठ ने कहा, सवाल यह नहीं है कि किसी अधिकार का उल्लंघन हुआ है। इन सभी आवेदनों में ऐसा लगता है कि अदालतों को कमोबेश हल्के में लिया जा रहा है। अनुमतियों का पालन मायने रखता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाता है और यहां तक कि आवेदकों को उनके यात्रा कार्यक्रम बने रहने के लिए आवेदन को बिना बारी के लिया जाता है।
पीठ ने कहा, 'यह स्वीकार्य नहीं है।' इसने कहा कि लुक आउट सर्कुलर पर रोक लगाने की मांग करने वाले लोगों को सही समय पर अदालत का रुख करना चाहिए और अदालतों पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। अदालत ने कहा कि जब अंतिम समय में आवेदन दायर किए जाते हैं तो यह 'बेहद हानिकारक' हो जाता है, क्योंकि आदेश पारित किए जाने होते हैं, तुरंत स्थानांतरित किए जाते हैं, फिर हस्ताक्षर किए जाते हैं और अपलोड किए जाते हैं।
अदालत ने कहा, 'हमें यह मानना चाहिए कि आवेदकों की अधिक सुविधा के लिए हमें ऐसा करने की आवश्यकता है, अदालत में व्यवधान अप्रासंगिक है।' अदालत ने कहा कि वह अब से अंतिम क्षण में दायर ऐसे आवेदनों पर विचार नहीं करेगी। पीठ संजय डांगी द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विदेश यात्रा की अनुमति और सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की गई थी।
डांगी ने तीन जुलाई तक अमेरिका और फिर सात जुलाई तक लंदन जाने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि उन्हें तत्काल सुनवाई की अनुमति दी जाए क्योंकि वह तुरंत वहां से जाना चाहते हैं।