एल्गार परिषद-माओवाद लिंक मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सागर गोरखे और रमेश गैचोर को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि जब सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है, तो समानता के आधार पर इन्हें भी जमानत मिलनी चाहिए।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एल्गार परिषद-माओवाद लिंक मामले के दो और आरोपियों सागर गोरखे और रमेश गैचोर को जमानत देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह कदम समानता के आधार पर उठाया, क्योंकि इस मामले के कई अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी थी। मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति एएस. गडकरी और एससी चंदक की पीठ ने दोनों आरोपियों को एक-एक लाख रुपए के जमानत बॉन्ड भरने के निर्देश दिए। गोरखे और गैचोर सितंबर 2020 से नवी मुंबई की ताजोला जेल में बंद थे।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि कई आरोपियों को लंबे समय तक जेल में रहने और यह संभावना देखते हुए कि मुकदमा जल्द शुरू नहीं होगा, पहले ही जमानत दी जा चुकी है। इसी कारण गोरखे और गैचोर को भी जमानत दी गई। यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित ‘एल्गार परिषद’ कार्यक्रम से जुड़ा है। पुलिस का आरोप है कि इस कार्यक्रम में दिए गए भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन पुणे के पास कोरेगांव-भीमा में हिंसा हुई थी।
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पुलिस ने किया था दावा
गौरतलब है कि शुरुआत में इस केस की जांच पुणे पुलिस ने की थी। पुलिस का दावा था कि इस कार्यक्रम को माओवादियों का समर्थन मिला हुआ था। बाद में यह जांच एनआईए को सौंप दी गई। इस केस के अन्य आरोपियों में वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, आनंद तेलतुंबड़े, वर्नन गोंसाल्वेस, अरुण फरेरा, शोमा सेन, गौतम नवलखा, सुधीर धवले, रोना विल्सन, ज्योति जगताओ और महेश राउत शामिल हैं।
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