बॉम्बे उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला नहीं है। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने अपनी याचिका में बीएमसी के आदेश को चुनौती दी थी। इसमें उन्होंने बृहन्मुंबई नगर निगम पर राजनीतिक प्रतिशोध लेने का आरोप भी लगाया था।
केंद्रीय मंत्री की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आरडी धानुका की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि राणे की याचिका खारिज करने योग्य थी। याचिका खारिज किए जाने के बाद राणे के वकील मिलिंद साठे ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के लिए समय मांगा। इसके बाद हाईकोर्ट ने छह सप्ताह के लिए अपने आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति आरडी धानुका की पीठ ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के खिलाफ जुहू बंगले में छह सप्ताह तक कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया।
दरअसल, बीएमसी ने केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के जुहू स्थित आवासीय बंगले के अनाधिकृत हिस्से को नियमित करने के एक आवेदन को खारिज कर दिया था। बीएमसी ने इसके पीछे बताया था कि उनका आवेदन नगरपालिका और तट क्षेत्र के मानदंडों का उल्लंघन था। इसके बाद 7 अप्रैल को बीएमसी द्वारा पारित आदेश को चुनौती देते हुए बुधवार को हाईकोर्ट से उन्होंने संपर्क किया था।
बीएमसी ने वरिष्ठ वकील एस्पी चिनॉय और अधिवक्ता जोएल कार्लोस के माध्यम से कहा कि नारायण राणे ने अपने बंगले के खुले क्षेत्रों में परिवर्तन किए और उन्हें प्रयोग करने योग्य बंद संरचनाओं में बदल दिया।
राणे के वकील साठे ने कहा कि राणे और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण बीएमसी ने नियमितीकरण के उनके आवेदन को खारिज कर दिया। इस पर चिनॉय ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया और कहा कि नागरिक निकाय ने कानून के अनुसार काम किया है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने केंद्रीय मंत्री की याचिका खारिज कर दी।