बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेमंड कंपनी की ओर से ठाणे सिविल कोर्ट में दायर की गई उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है जिसमें कंपनी के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया की पुस्तक ‘दि इनकंपलीट मैन’ के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग की गई है। सिंघानिया ने आत्मकथा लिखी है जिसे किताब के रूप में प्रकाशित कराना चाहते हैं।
ठाणे सिविल कोर्ट में सुनवाई पर रोक लगाने की मांग को लेकर विजयपत सिंघानिया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका में सिंघानिया ने कहा है कि उन्हें ठाणे कोर्ट जाने में असुविधा होती है।
इसलिए ठाणे कोर्ट में दायर किए गए दावे को मुंबई सिटी सिविल कोर्ट में सुनवाई के लिए स्थानांतरित कर दिया जाए। क्योंकि, मुंबई के सिटी सिविल कोर्ट में भी इसी तरह के मुद्दे को लेकर दावा दायर किया गया। सिंघानिया ने अपनी याचिका में कहा है कि जब तक हाईकोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं हो जाती है तब तक ठाणे कोर्ट में दायर किए गए दावे की सुनवाई पर रोक लगाई जाए।
विजयपत सिंहानिया के बेटे गौतम सिंघानिया ने रेमंड कंपनी के माध्यम से सितंबर 2018 में ठाणे कोर्ट में याचिका दायर कर आत्मकथा के प्रकाशन पर रोक लगाने की मांग की है। कंपनी ने आशंका जाहिर की है कि उनके पिता की आत्मकथा में कई मानहानिपूर्ण बाते हो सकती हैं।